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 कैबिनेट के फैसले / खरीफ की 14 फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाया, धान में 53 रुपए का इजाफा; 250 करोड़ रुपए तक टर्नओवर वाले बिजनेस मीडियम एंटरप्राइजेज कहलाएंगे
June 1, 2020 • Rajkumar Gupta

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में आज अहम फैसले हुए। खरीफ की 14 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने की मंजूरी दी गई है। सरकार का कहना है कि किसानों को एमएसपी के जरिए उनके लागत मूल्य से 50-83% ज्यादा मूल्य मिलेगा। धान का एमएसपी 53 रुपए बढ़ाकर 1,868 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इसके अलावा एमएसएमई (छोटे) उद्योगों से जुड़ी योजनाओं को भी मंजूरी दी गई।

एमएसएमई की परिभाषा बदलने को मंजूरी, मीडियम एंटरप्राइजेज का दायरा और बढ़ा
अब 250 करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाले बिजनेस मीडियम एंटरप्राइजेज कहलाएंगे। पिछले महीने घोषित किए गए 20 लाख करोड़ के पैकेज में एमएसएमई की परिभाषा बदलने का ऐलान किया गया था। कैबिनेट ने इसे भी मंजूरी दे दी है। साथ ही मध्यम कारोबार (मीडियम एंटरप्राइजेज) के लिए टर्नओवर की लिमिट बढ़ाकर 250 करोड़ रुपए कर दी है। यानी इतने तक टर्नओवर वाले बिजनेस मीडियम एंटरप्राइजेज माने जाएंगे। इस 250 करोड़  में एक्सपोर्ट का रेवेन्यू शामिल नहीं किया जाएगा। आर्थिक पैकेज घोषित करते वक्त सरकार ने टर्नओवर की लिमिट 100 करोड़ रुपए तय की थी। वहीं मीडियम एंटरप्राइजेज के लिए निवेश की लिमिट भी 20 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 50 करोड़ रुपए की गई है।
रेहड़ी वालों को लोन की सौगात
यूनियन कैबिनेट की इस बैठक में रेहड़ी पटरी और ठेले वालों के लिए एक विशेष ऋष योजना की भी घोषणा हुई। इससे रेहड़ी पटरी ठेले वाले, छोटी दुकान वाले, सड़क पर माल बेचने वाले लोगों की क्षमता बढ़े और उनका काम चले, इसके लिए अधिक लोन दिया जाएगा और ये योजना लंबी चलेगी। इससे 50 लाख से अधिक लोग लाभान्वित होंगे। रेहड़ी पटरी और ठेले लगाकर बहुत से लोग सब्जी, फल, चाय, पकौडा, चप्पल, किताब, अंडा और कई अन्य चीजें बेचते हैं। इसके तहत सैलून, मोची, लॉन्ड्री और पान की दुकानें भी आएंग। कोविड-19 के दौरान इनका ध्यान रखने के लिए योजना शुरू की गई है, ताकि उन्हें मदद मिले। 
10 हजार तक का मिलेगा लोन
फुटपाथ दुकानदारों को इस योजना के तहत 10 हजार रुपए का लोन दिया जाएगा, जिसे वह मासिक किश्तों में 1 साल में लौटा सकते हैं। समय से भुगतान में 7 फीसदी वार्षिक ब्याज सब्सिडी के रूप में लाभार्थी के खाते में डाल दिए जाएंगे। जावड़ेकर ने घोषणा करते हुए साफ किया कि इसमें कोई दंड का प्रावधान नहीं है। बैंक और स्वयं सहायता समूहों की जिम्मेदारी भी तय की गई है, ताकि ये फायदा जिनके लिए है, उन तक आसानी से पहुंच सके। इसमें पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए पोर्टल और मोबाइल ऐप भी तैयार किए गए