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भारत में देशव्यापी लॉकडाउन ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई को धार दी-कोरोना संक्रमण के मामले में देश की स्थिति बेहतर
April 17, 2020 • Rajkumar Gupta

 

नई दिल्ली
कोरोना संकट पर देशव्यापी लॉकडाउन का बेहद सकारात्मक परिणाम मिल रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, लॉकडाउन के कारण कोरोना पॉजिटिव केस के दोगुना होने की रफ्तार थमी है। कोरोना पर डेली प्रेस ब्रीफिंग में स्वास्थ्य मंत्रालय से संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा, 'लॉकडाउन से पहले डबलिंग रेट 3 दिन था जो अब पिछले सात दिनों का आंकड़ा देखें तो डबलिंग रेट घटकर 6.2 दिनहो गया है।' इसी तरह कोरोना केसेज के ग्रोथ फैक्टर में 40% की गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने कहा, '1 अप्रैल से 1.2 ऐवरेज ग्रोथ फैक्टर है। दो हफ्ते पहले 15 से 31 मार्च के बीच 2.1 ऐवरेज ग्रोथ फैक्टर था। यानी, ग्रोथ फैक्टर में 40 प्रतिशत की गिरावट आई है।'

कोरोना संक्रमण के मामले में देश की स्थिति बेहतर
अग्रवाल ने बताया कि 19 राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों में तो डबलिंग रेट राष्ट्रीय औसत से भी कम है। उन्होंने कहा, 'केरल, उत्तराखंड, हरियाणा, लद्दाख, हिमाचल, चंडीगढ़, पुदुचेरी, बिहार, तेलंगाना, ओडिशा, तामिलनाडु, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, असम और त्रिपुरा में डबलिंग रेट देश के औसत से भी कम है।' इतना ही नहीं, भारत में कोविड-19 मरीजों के ठीक होने का औसत भी बाकी देशों के मुकाबले बेहतर है। अग्रवाल ने कहा, भारतका आउटकम रेशियो (मरीजों के ठीक होने का औसत) दूसरे देशों से बेहतर है। यहां 80% मरीज ठीक हो रहे हैं जबकि 20% मरीजों की मौत हो रही है।'

मेडिकल इक्विपमेंट्स के घरेलू उत्पादन पर जोर
अग्रवाल ने कहा कि चीन से आए 5 लाख टेस्टिंग किट्स जरूरी जगहों पर बांटे जा रहे हैं। साथ ही, कोविड से लड़ने के लिए जरूरी मेडकिल इक्विपमेंट्स देश में बनाने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं, वायरल सिक्वेंसिंग के जरिए एपिडमॉलजी, पोंटेशियली इंपोटेंट म्यूटेशन की पहचान कैसे हो, इस पर काम चल रहा है। वैक्सीन बनाने की दिशा में इनऐक्टिवेटड वायरस, एंटीजन्स को परखने के लिए ऐंटीबॉडी, मोनोक्लोनल्स और अन्य वैक्सीन पर भी काम किया जा रहा है। अग्रवाल ने बताया कि भारत ग्लोबल पार्टनर्स के साथ काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि इम्यून बूस्टिंग वैक्सीन पर भी काम चल रहा है। इम्यून सिस्टम को बढ़ाने में देश के पारंपरिक ज्ञान का भी उपयोग हो रहा है। प्रभावी दवाइयों पर भी काम करने की रणनीति बन रही है।

इन चार संस्थानों में जारी है रिसर्च
अग्रवाल ने कहा कि काउंसिल फॉर साइंस ऐंड इंडस्ट्रियल रिसर्च, डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नॉलजी, डिपार्टमेंट ऑफ साइंस ऐंड टेक्नॉलजी, डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी, इन चारों संस्थानों ने टेस्टिंग कपैसिटी बढ़ाने के लिए अपनी 30 लैब्स का योदान दिया है। हमारा प्राथमिक मकसद नए डायग्नोस्टिक और टेस्टिंग किट्स बनाने का है जो 30 मिनट में रिजल्ट दे दे। अग्रवाल ने कहा, 'हमारे वैज्ञानिक प्रयोशालाओं में हर महीने 6 हजार वेंटिलेटर्स बनाने की क्षमता पैदा की गई है। इस तरह, डायग्नोस्टिक, थेरेप्यूटिक्स और वैक्सीन, सभी क्षेत्रों में तेज गति से काम हो रहा है।'उन्होंने कहा कि CSIR की इंजीनियरिंग लैब्स और सी चित्रा इंस्टिट्यूट्स पीपीई, ऑक्सिजन कंटेनेटर्स, वेंटिलेटर्स और ऐसी एंसिटिएटरी सपोर्ट डिवाइसेज की डिजाइन बना रहे हैं ताकि इनका देश में उत्पादन हो सके। उन्होंने कहा, 'RTPCR किट्स के घरेलू उत्पादन पर काम चल रहा है। मई तक देश में हर महीने 10 लाख रैपिड टेस्टिंग किट्स और डिटेक्शन किट्स बना सकेंगे। प्लाज्मा थेरपी पर भी काम चल रहा है।'

देश में अब तक 13,387 कोविड-19 मरीज
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 1,749 कोविड-19 मरीज ठीक हो चुके हैं जो कुल मरीजों के 13.06% हैं। गुरुवार तक देशभर में 13,387 कोरोना पॉजिटिव केस सामने आए। एक दिन में 1,007 केस आए। मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि पिछले 24 घंटे में 23 नई मौतें हुई हैं।