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छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम अजीत जोगी का निधन-शनिवार को गोरैला में होगा अंतिम संस्कार
May 29, 2020 • Rajkumar Gupta

रायपुर।
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी  का आज दोपहर लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। बीते 9 मई को कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें रायपुर के श्री नारायण अस्पताल में भर्ती किया गया था। इसके बाद से वे लगातार कोमा में थे। डॉक्टरों के अनुसार शुक्रवार दोपहर उन्हें फिर से कार्डियक अरेस्ट आया। डॉक्टरों के हरसंभव प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। जोगी ने करीब 3.30 बजे आखिरी सांस ली।

शनिवार को अंतिम संस्कार
अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी ने ट्विटर पर पूर्व सीएम की मौत की खबर की पुष्टि की। उन्होंने यह भी बताया कि अंतिम संस्कार शनिवार को अजीत जोगी के जन्मस्थान गोरैला में होगा।

सीएम बघेल, रमन सिंह ने जताया दुख
अजीत जोगी (Ajit Jogi) के निधन पर राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दुख जताया है। बघेल ने ट्विटर पर लिखा कि जोगी की मृत्यु प्रदेश के लिए बड़ी क्षति है।


राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता रमन सिंह ने भी जोगी के निधन पर श्रद्धांजलि दी है। रमन ने जोगी के निधन को राज्य के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी जोगी के निधन पर अपनी संवेदना व्यक्त की है। नीतीश ने कहा कि जोगी का छत्तीसगढ़ के अलावा देश की राजनीति में भी बहुमूल्य योगदान रहा है। उनके निधन से राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है।

9 मई को हुए भर्ती
जोगी को 9 मई को कार्डियक अरेस्ट के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पूर्व सीएम के स्टाफ ने बताया कि 9 मई को सुबह नाश्ता करते हुए जोगी को अचानक सीने में दर्द महसूस हुआ और सांस लेने में दिक्कत होने लगी। पत्नी रेणु जोगी इनके पास थीं और उन्होंने ही घर पर मौजूद स्टाफ को इसकी जानकारी दी। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया और स्थिति गंभीर होने के चलते वेंटिलेटर पर रखा गया था। पिता की तबियत खराब होने की सूचना मिलते ही बेटे अमित जोगी भी बिलासपुर पहुंच गए थे।

लंबे समय तक कांग्रेस में रहे जोगी
अलग छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद पहले मुख्यमंत्री बने जोगी अपने अंतिम समय में जेसीसी-जे पार्टी से जुड़े थे। उन्होंने खुद ही इस पार्टी का गठन किया था। हालांकि, इससे पहले उन्होंने कांग्रेस में लंबी पारी खेली। आईएएस की नौकरी छोड़ राजनीति में आए जोगी राज्य विधानसभा, लोकसभा, राज्यसभा और केंद्रीय कैबिनेट के सदस्य रहे। वे नवंबर 2000 से नवंबर 2003 तक छत्तीसगढ़ के गठन के बाद राज्य के पहले मुख्यमंत्री रहे। 

अजीत जोगी ने राजनीति में ऐसी छाप छोड़ी है जो सदियों तक याद की जाती रहेगी। अजीत जोगी के पूरे जीवन के सफर में अनेकों ऐसे किस्से हैं जो किसी चौंकाते हैं। आदिवासी समाज से आने वाले अजीत जोगी गांव की गलियों में नंगे पांव पले बढ़े और मिशनरी की मदद से शिक्षा पूरी कर पहले इंजीनियरिंग फिर यूपीएससी की परीक्षा पास कर कलेक्टर बने। जोगी ने एक ही जिंदगी में इतने उतार-चढ़ाव देखे जिसपर पहली नजर में भरोसा करना मुश्किल लगता है। आइए उनसे जुड़े 3 ऐसे किस्सों पर नजर डालते हैं जिनसे उनकी जिंदगी को समझा जा सकता है।

जोगी ने यूं की गांधी फैमिली में एंट्री
रेकॉर्ड 14 साल जिलाधिकारी रहे अजीत जोगी गांधी परिवार के बेहद करीबी रहे। बताया जाता है कि अजीत जोगी जब रायपुर के जिला कलेक्टर थे तब राजीव गांधी पायलट हुआ करते थे। राजीव गांधी की फ्लाइट जब कभी रायुपर में लैंड होती तो तत्कालीन जिला कलेक्टर अजीत जोगी खुद उन्हें रिसीव करने एयरपोर्ट जाया करते थे। उस वक्त राजीव भी यंग थे और जोगी भी। इस वजह से दोनों के बीच काफी अच्छी दोस्ती जैसा रिश्ता बन गया था। इस तरह एक जिले के कलेक्टर अजीत जोगी की पहुंच तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आवास तक हो चुकी थी।.

ढाई घंटे में कलेक्टर से राजनेता बने अजीत जोगी
बतौर इंदौर के कलेक्टर अजीत जोगी ग्रामीण इलाके के दौरे पर गए थे। रात में जब वह घर लौटे तो पत्नी रेणु ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय से फोन आया था। पहले तो जोगी को लगा कि भला पीएमओ से किसी कलेक्टर को क्यों कॉल आएगा। लेकिन अगली सुबह तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के पीए ने उनसे संपर्क किया। उन्होंने जोगी से कहा कि प्रधानमंत्री चाहते हैं कि आप तत्काल कलेक्टर पद से इस्तीफा दे दें। यह सुनते ही जोगी थोड़े घबरा गए। लेकिन अगले ही वाक्य में पीएम के पीए ने कहा कि प्रधानमंत्री चाहते हैं आप मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए नॉमिनेशन करें। उनसे कहा कि रात 12 बजे तक दिग्विजय सिंह उन्हें लेने इंदौर पहुंचेंगे। सुबह 11 बजे तक इस्तीफे की सारी औपचारिकता पूरी कर ली जाएगी। कलेक्टर पद से इस्तीफा देने और कांग्रेस की सदस्यता लेने में करीब ढाई घंटे का वक्त लगा। इस तरह अजीत जोगी कलेक्टर से राजनेता बने।

जोगी की वजह से टूटी सगाई
यूं तो अजीत जोगी जनाधार वाले नेता नहीं माने जाते रहे, लेकिन कुछ समाज के बीच उनकी अच्छी पकड़ रही। इसकी बानगी 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान अखबारों में प्रकाशित एक रिपोर्ट से होती है। अजीत जोगी थे तो आदिवासी समाज से थे, लेकिन अनूसुचित श्रेणी में आने वाला सतनामी समाज भी उन्हें अपना नेता मानता था। उस दौर के अखबारों में एक खबर छपी थी कि अजीत जोगी पर बहस के चलते लड़का-लड़की की सगाई टूट गई थी। दरअसल, बात यह थी कि छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव हारने के बाद अजीत जोगी महासमुंद लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में थे। इस सीट पर उनके विपरीत बीजेपी के वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल थे।

दोनों परिवारों के बीच सगाई की रस्म चल रही थी। भोजन का दौर चल रहा था। इसी दौरान लड़की पक्ष के लोगों ने नॉर्मल बातचीत में लड़के वालों से पूछ लिया कि इस बार के चुनाव में महासमुंद लोकसभा सीट से किसका पलड़ा भारी है। लड़के वालों ने कहा कि अजीत जोगी महासमुंद से चुनाव हार रहे हैं। यह बात लड़की वालों को नागवार गुजरी। देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि लड़की वालों ने कहा कि जो परिवार अजीत जोगी का विरोधी है वे उनके साथ रिश्ता नहीं करेंगे। गांव वालों के बीच-बचाव से दोनों परिवारों का झगड़ा तो टल गया, लेकिन सगाई टूट गई। हालांकि अजीत जोगी यह चुनाव जीत गए थे। दिलचस्प बात यह है कि इस लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान अजीत जोगी की कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसमें उनके शरीर के कमर के नीचे का हिस्सा काम करना बंद कर दिया था। दुर्घटना की वजह से अजीत जोगी प्रचार नहीं कर सके लेकिन फिर भी वह जीते थे।