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दिल्‍ली-एनसीआर को जल्‍द हिला सकता है एक बड़ा भूकंप, IIT प्रफेसर ने दी वार्निंग
June 6, 2020 • Rajkumar Gupta

नई दिल्‍ली/रांची
पिछले दो महीनों में दिल्‍ली कई बार कांप चुकी है। भले ही भूकंप के ये झटके हल्‍के रहे हों, एक डर लोगों के दिलों में बैठ गया है। एक्‍सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि दिल्‍ली-एनसीआर में एक बड़े भूकंप का खतरा है। हल्‍के झटके बार-बार लगना किसी बड़े भूकंप का संकेत है। यह इंडियन इं‍स्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी (IIT) के एक्‍सपर्ट्स का कहना है। आने वाले कुछ दिनों में दिल्‍ली और एनसीआर में हाई इन्‍टेंसिटी का भूकंप आ सकता है। IIT धनबाद के डिपार्टमेंट्स ऑफ अप्‍लाइड जियोफिजिक्‍स और सीस्‍मोलॉजी ने लंबी रिसर्च के बाद यह चेतावनी दी है।

दिल्‍ली और आसपास के इलाके में जमा हो रही एनर्जी
IIT धनबाद में सीस्‍मोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड पी.के. खान कहते हैं, "कम तीव्रता के झटके बार-बार लगना एक बड़े भूकंप का संकेत है।" उन्‍होंने कहा कि पिछले दो साल में दिल्‍ली-एनसीआर ने रिक्‍टर स्‍केल पर 4 से 4.9 तीव्रता वाले 64 भूकंप देखे हैं। वहीं पांच से ज्‍यादा तीव्रता वाले भूकंप 8 बार आए। खान के मुताबिक, "यह दिखाता है कि इलाके में स्‍ट्रेन एनर्जी बढ़ रही है खासतौर से नई दिल्‍ली और कांगड़ा के नजदीक।" 
फॉल्‍ट लाइन के बेहद करीब है दिल्‍ली
प्रफेसर खान ने बताया कि एनसीआर और उत्‍तरकाशी की दूरी सिर्फ 260 किलोमीटर है जबकि कांगड़ा 370 किलोमीटर दूर है। दोनों इलाके खतरनाक भूकंप आने के लिए जाने जाते हैं। इस फॉल्‍ट लाइन पर एक बड़ा भूकंप एनसीआर को प्रभावित करेगा ही करेगा। कांगड़ा के नजदीक स्थित चम्‍बा में साल 1945 में 6.3 तीव्रता का भूकंप आया था। पास के ही धर्मशाला ने 1905 में 7.8 तीव्रता का भूकंप झेला था।

उत्‍तरकाशी से आ सकता है बड़ा खतरा
IIT प्रफेसर के मुताबिक, हाल की सीस्मिक ऐक्टिविटी की क्‍लस्टरिंग छोटी है। उत्‍तरकाशी के नजदीक गढ़वाल में एक निष्क्रिय इलाका है जहां पर 1803 में 7.7 और 1991 में 6.8 तीव्रता का भूकंप आया था। बढ़ते शहरीकरण और बिल्‍डर्स के भूकंप संबंधी मानकों का पालन न करने के चलते एक बड़ा भूकंप एनसीआर के लिए प्रलयकारी साबित हो सकता है। खान ने कहा कि दिल्‍ली-हरिद्वार रिज पर भी हलचल हो रही है। वहां हर साल प्‍लेट में 44 मिलीमीटर का मूवमेंट देखने को मिल रहा है।