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इंदिरा गांधी के चहेते रामकृष्ण द्विवेदी का निधन, जिन्होंने यूपी के सीएम को हराया था
April 27, 2020 • Rajkumar Gupta

लखनऊ
उत्तर प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और वयोवृद्ध नेता रामकृष्ण द्विवेदी का आज सुबह लखनऊ के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। वह काफी समय से बीमार थे। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर श्रद्धांजलि दी। वह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के करीबी थे और यूपी के पूर्व सीएम त्रिभुवन नारायण सिंह को हराया था।
राहुल ने अपने ट्वीट में लिखा, 'उत्तर प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और इंदिरा जी के सहयोगी रामकृष्ण द्विवेदी जी के निधन की खबर सुनकर दुख हुआ। दुख की इस घड़ी में मेरी शोक संवेदनाएं उनके परिवार और प्रियजनों के साथ है।' बताते हैं कि जब इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री हुआ करती थीं। उस वक्त रामकृष्ण द्विवेदी उनके चहेते और सबसे ज्यादा विश्वासपात्र हुआ करते थे।1971 उपचुनाव में यूपी के सीएम को हराया था
यहां तक कि 1971 में जब यूपी में उपचुनाव हुए थे तो रामकृष्ण द्विवेदी ने तत्कालीन सीएम त्रिभुवन नारायण सिंह को मात दे दी थी। दरअसल हुआ यह था कि 18 अक्टूबर 1970 को संयुक्त विकास दल के नेता के तौर पर त्रिभुवन नारायण सिंह ने यूपी के सीएम पद की शपथ ली थी लेकिन तब वह विधानमंडल के किसी सदन के सदस्य नहीं थे।

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि छह महीने के अंदर उन्हें किसी सदन का सदस्य होना जरूरी है। उधर, महंत दिग्विजयनाथ के निधन से गोरखपुर लोकसभा सीट खाली थी। उनके उत्तराधिकारी महंत अवैद्यनाथ ने लोकसभा उपचुनाव में खड़े होने के लिए मनीराम विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया।

इंदिरा गांधी ने किया था प्रचार
मनीराम सीट से चुनाव लड़ने के लिए तत्कालीन सीएम त्रिभुवन नारायण सिंह को बुलाया गया। उनके सामने इंदिरा गांधी के करीबी रामकृष्ण द्विवेदी। बताते हैं कि इंदिरा के कहने पर ही रामकृष्ण द्विवेदी उपचुनाव में उतरे थे। इंदिरा ने उनके लिए जमकर प्रचार भी किया। कांग्रेस उम्मीदवार रामकृष्ण द्विवेदी ने चुनाव में मुख्यमंत्री लगभग 16 हजार वोटों से हारे। उन्हें अपनी सीट भी छोड़नी पड़ी।

इंदिरा (आई) के लिए संजीवनी थी उपचुनाव की जीत
यूपी कांग्रेस के नेता अंशु अवस्थी बताते हैं, 'रामकृष्ण द्विवेदी गोरखपुर यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ के अध्यक्ष थे। 1971 के उपचुनाव से पहले कांग्रेस दो भागों में बंट चुकी थी। इंदिरा गांधी वाली कांग्रेस (आई) के लिए यह उपचुनाव किसी चुनौती से कम नहीं था।' उन्होंने बताया कि उपचुनाव में रामकृष्ण द्विवेदी को मिली जीत ने कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम किया। यह कांग्रेस (आई) के लिए पहली जीत भी थी। इस जीत के बाद रामकृष्ण द्विवेदी का कद ऐसा बढ़ा कि उन्हें अगली सरकार में गृहमंत्री बनाया गया था।

रामकृष्ण का पार्टी से निष्कासन कर दिया गया था
बता दें कि यूपी कांग्रेस ने पिछले साल जिन 10 वरिष्ठ नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में निष्कासित कर दिया था उसमें रामकृष्ण द्विवेदी भी शामिल थे। कहा गया कि रामकृष्ण द्विवेदी ने प्रियंका गांधी के कुछ फैसले पर असहमति जताई थी। इसके बाद उन्हें 19 नवंबर को पार्टी से निकाल दिया गया था।

मानवीय संवेदना के आधार पर निष्कासन रद्द हुआ था
पिछले दिनों रामकृष्ण की तबीयत काफी बिगड़ने पर पार्टी ने उनका निष्कासन वापस ले लिया था। कांग्रेस ने इसके पीछे मानवीय मानवीय संवेदनाओं को आधार बताया था जिस पर पार्टी की काफी आलोचना भी हुई थी। वह लखनऊ में भर्ती थे।