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जानें, क्या और कौन हैं इंसिडेंट कमांडर, लॉकडाउन में क्या है इनका रोल
April 15, 2020 • Rajkumar Gupta

नई दिल्ली
देशव्यापी लॉकडाउन के दूसरे चरण के शुरू होने के साथ ही बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लॉकडाउन 2.0 से जुड़े दिशानिर्देशों को जारी किया। 'जान भी जहान भी' थीम के अनुरूप इस बार कृषि और सीमित औद्योगिक व निर्माण गतिविधियों को शर्तों के साथ छूट दी गई है। हालांकि, गृह मंत्रालय की गाइडलाइन काफी सख्त है और उल्लंघन करने वालों पर सरकार किसी भी तरह के रहम के मूड में नहीं है।
लॉकडाउन के नियमों का कड़ाई से पालन करने के लिए हर जिले में 'इंसिडेंट कमांडर' होंगे। गाइडलाइन में इंसिडेंट कमांडरों के रोल को भी स्पष्ट किया गया है। आइए जानते हैं कि क्या है इंसिडेंट कमांडर और लॉकडाउन में इसकी क्या भूमिका होगी। 
संबंधित क्षेत्र के सभी विभाग इंसिडेंट कमांडर के निर्देश पर करेंगे काम
लॉकडाउन 2.0 के दौरान जो पाबंदियां लगाई गई हैं और 20 अप्रैल से जिन क्षेत्रों को छूट दी गई है, उनके पालन को सुनिश्चित करने के की जिम्मेदारी इंसिडेंट कमांडरों की ही होगी। सभी विभागों के अधिकारियों को उस क्षेत्र के इंसिडेंट कमांडर के निर्देशों पर ही काम करना होगा। 
कौन करेगा इनकी तैनाती
गृह मंत्रालय की गाइडलाइन में कहा गया है कि पाबंदियों और छूट को लागू करने के लिए हर जिले में डीएम एग्जिक्यूटिव मैजेस्ट्रेट्स को इंसिडेंट कमांडरों के रूप में तैनात करेंगे। 
नियमों को पूरी तरह लागू करने की जिम्मेदारी इंसिडेंट कमांडरों की
अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में ये इंसिडेंट कमांडर लॉकडाउन के नियमों को पूरी तरह लागू करने के लिए जिम्मेदार होंगे। लोगों के मूवमेंट पर बंदिशें होंगी लेकिन जरूरी सामानों के मूवमेंट पर किसी तरह की कोई बंदिश नहीं होगी। जरूरी मूवमेंट के लिए संबंधित क्षेत्र के इंसिडेंट कमांडर ही पास जारी करेंगे। 
हॉस्पिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में कोई बाधा न आने की जिम्मेदारी भी इनकी
इन इंसिडेंट कमांडरों को ही यह सुनिश्चित करना होगा कि हॉस्पिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए जरूरी संसाधन, वर्करों और सामग्री की व्यवस्था हो ताकि बिना किसी बाधा के ये काम हो सकें। पाबंदियों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ डिजास्टर मैनेजमेंट ऐक्ट 2005 के सेक्शन 51 से लेकर 60 तक और आईपीसी की धारा 188 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।