ALL Rajasthan
जम्मू-कश्मीर: पार्टियों ने परिसीमन योजना से किया किनारा, 'आयोग का हिस्सा होना 5 अगस्त स्वीकारने जैसा'
May 30, 2020 • Rajkumar Gupta

श्रीनगर
नैशनल कॉन्फ्रेंस ने केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में परिसीमन के लिए गठित आयोग से किनारा कर लिया। पार्टी ने कहा कि परिसीमन आयोग में नियुक्त किए गए उसके तीन सांसद प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेंगे क्योंकि वे किसी भी सूरत में पिछले साल पांच अगस्त को हुए घटनाक्रम को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। बता दें कि 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य दर्जा हटा दिया गया था।
परिसीमन पर नैशनल कॉन्फ्रेंस के स्टैंड का पीडीपी, पीपल्स कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस समेत बाकी दलों ने समर्थन किया और कहा कि 5 अगस्त 2019 के बाद यहां किसी भी तरह का कार्य अवैध और अंसवैधानिक है और इसे किसी भी रूप में स्वीकारा नहीं जाएगा। हाल ही में लॉन्च जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी और पैंथर्स पार्टी ने परिसीमन के समय की आलोचना की और आयोग में जम्मू-कश्मीर के नेताओं को शामिल करने की मांग की।

जम्मू-कश्मीर के 5 सांसदों को बनाया था हिस्सा
बता दें कि केंद्रीय विधि मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर, पूर्वोत्तर के राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नगालैंड) के लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में परिसीमन आयोग गठित किया है। इसी हफ्ते कमिटी में जम्मू-कश्मीर के 5 सांसदों को सदस्य बनाया गया है।

फारूक अब्दुल्ला भी थे आयोग में शामिल
नैशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला सहित पार्टी के तीन सांसदों को मंगलवार को आयोग का सहायक सदस्य नियुक्त किया गया था। आयोग जम्मू कश्मीर में परिसीमन का कार्य प्रारंभ करेगा, जहां विधानसभा सीटों की संख्या 107 से बढ़ा कर 114 की जानी है। इनमें 24 सीटें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के लिए आरक्षित हैं।

'आयोग में भाग लेना 5 अगस्त को स्वीकारने जैसा'
इस प्रक्रिया को खारिज करते हुए नैशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा कि आयोग जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की उपज है। जबकि इस अधिनियम को पार्टी सुप्रीम कोर्ट के अंदर और बाहर चुनौती दे रही है। पार्टी ने एक बयान में कहा, 'आयोग में भाग लेना पांच अगस्त 2019 के घटनाक्रमों को स्वीकार करने के समान होगा, जो करने को नैशनल कॉन्फ्रेंस अनिच्छुक है।'

90 के दशक में हुआ था जम्मू-कश्मीर का परिसीमन
इसमें कहा गया है कि अब्दुल्ला के अलावा, दो अन्य सांसद अकबर लोन और हसनैन मसूदी आयोग में भाग नहीं लेंगे। पार्टी ने इस बात का जिक्र किया कि केंद्र शासित प्रदेश के पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर प्रांत के संविधान के मुताबिक, जम्मू कश्मीर के निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन देश के शेष राज्यों के साथ 2026 में किया जाना था। राज्य में आखिरी बार निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन 1990 के दशक में किया गया था। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नैशनल कॉन्फ्रेंस के तीन सांसदों के अलावा जम्मू कश्मीर, पूर्वोत्तर के राज्यों असम, अरूणाचल प्रदेश, मणिपुर और नगालैंड के 12 सांसदों को परिसीमन आयोग का सहयोगी सदस्य नामित किया है। इन सांसदों में दो केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं।