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जनरल बिपिन रावत की सलाह- आयात की बजाय अपने हथियार बनाने पर ध्यान दें सेनाएं
May 10, 2020 • Rajkumar Gupta

नई दिल्ली
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत) ने सेनाओं को आयात कम करने की सलाह दी है। बिपिन रावत ने कहा है कि विदेशी हथियारों और अन्य सुरक्षा उपकरणों की खरीद की बजाय 'मेक इन इंडिया' ) पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि सेनाओं को जरूरत है कि वे अपने हिसाब से चीजें तय करें ना कि अमेरिका या अन्य देश को देखकर। जनरल रावत ने इशारों ही इशारों में बताया है कि हथियारों की खरीद में खर्च होने वाले पैसे को सही तरह से मैनेज करके भारत खुद की डिफेंस इंडस्ट्री तैयार कर सकता है।
 एक इंटरव्यू में जनरल रावत ने कहा है, 'हम उस तरह की सेना नहीं हैं, जिन्हें दुनियाभर में तैनात होना होता है। हमें सिर्फ अपनी सीमाओं की रक्षा करनी है और वहीं लड़ना है। साथ ही हमें भारतीय समुद्री क्षेत्र पर भी दबदबा रखना है। इसलिए हमें अपनी जरूरतों की गलत छवि ना बनाते हुए आयात कम करना चाहिए।'

'हथियारों की खरीद और मेंटनेंस काफी महंगा'
तीनों सेनाओं के मुखिया जनरल बिपिन रावत ने कहा, 'कोरोना वायरस से हर कोई प्रभावित हुआ है। हमें यथार्थवादी बनना होगा और अजस्ट करना होगा। हमें अपनी जरूरतों को समझते हुए अपने ऑपरेशन्स की प्राथमिकताएं तय करनी होंगी। हथियारों का आयात, उनके साजों सामान की खरीद और उनका मेंटनेंस काफी महंगा हो गया है।' जनरल बिपिन रावत का संकेत है कि देश की सेनाओं को विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करनी होगी। 
कोरोना वायरस के कारण देश के आर्थिक हालात को देखते हुए यह संभावना है कि डिफेंस बजट में कमी की जाएगी। ऐसे में जनरल रावत का यह बयान काफी अहम है। फिलहाल किसी भी प्रकार की डिफेंस डील और विदेश हथियारों की खरीद की कोई भी प्रक्रिया नहीं चल रही है। आपको बता दें कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक देश है। पहले नंबर पर सऊदी अरब है, जोकि हथियारों की मार्केट में 9.2 पर्सेंट का खरीदार है।

'मेन इन इंडिया' के बावजूद लाख करोड़ की डील हुई
हाल के कुछ सालों में भारत ने कुछ बड़ी डिफेंस डील की हैं। इनमें 59 हजार करोड़ की 36 फ्रेंच राफेल फाइटर जेट और 40 हजार करोड़ रुपये की पांच रूसी जमीन से आसमान में मार करने वाले S-400 मिसाइल स्क्वॉड्रान की डील शामिल है। ये डील उस वक्त की गई हैं, जब भारत 'मेक इन इंडिया' पर ध्यान देने की बात कह रही है।

जनरल रावत कहते हैं कि भारत के पास मजबूत और घरेलू डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस बनाने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है। उनका यह भी कहना है कि शुरुआत में कम टेक्निकल स्पेसिफिकेशन्स के साथ देसी हथियार तैयार किया जा सकते हैं। बिपिन रावत कहते हैं, 'हमें मेक इन इंडिया को बढ़ावा देते हुए अपनी इंडस्ट्रीज को खड़ा करना चाहिए। शुरुआत में अगर वे 70 पर्सेंट जनरल स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स (जीएसक्यूआर) के साथ भी डिलिवर करें तो उन्हें मौका दिया जाना चाहिए, इससे वे कुछ ही दिनों में बेहतर और नई तकनीक के हथियार दे सकेंगे।' 
दरअसल, भारत में डीआरडीओ, ऑर्डनैंस फैक्ट्रीज और घरेलू इंडस्ट्रीज तय समय में जरूरी जीएसक्यूआर के हथियार डिलिवर करने में सक्षम नहीं हैं। जनरल रावत इस बारे में कहते हैं, 'हमें अपनी जरूरत के हिसाब से खुद के जीएसक्यूआर तैयार करने चाहिए। हमें यह नहीं देखना चाहिए कि अमेरिका या दूसरे अडवांस देशों के पास क्या है।'

'स्वदेशी कंपनियों को मिले मौका, मारुति की तरह बनेगा डिफेंस हब'
जनरल रावत आगे कहते हैं कि अगर कोई ऐसा हथियार है, जो भारतीय कंपनियां नहीं बना सकती हैं तो उनके लिए विदेशी कंपनियों से 'मेक इन इंडिया' के लिए संपर्क करना चाहिए। उन्होंने यह भी उदाहरण दिया कि एक समय में मारुति-800 जैसी छोटी कार से शुरुआत करने वाला भारत आज ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का हब बन गया है।

फिलहाल इंडियन आर्मी सीमा पर तैनात जवानों के लिए अमेरिका और इजरायल से अडवांस असॉल्ट राइफल्स और लाइट मशीन गन्स खरीद रही है। भविष्य में आर्मी की ज्यादातर जरूरतें 'मेक इन इंडिया' प्रॉजेक्ट्स से पूरी की जा सकेगी। जनरल रावत कहते हैं, 'जितना आप चाहते हैं, उतने संसाधन कभी नहीं होंगे। जरूरी बजट का सही उपयोग बेहद जरूरी है। साथ ही सोच-समझकर प्राथमिकताएं तय करना भी बेहद जरूरी है।'
अपने हिसाब से तय करनी होंगी अपनी जरूरतें'
नेवी के बारे में जनरल रावत कहते हैं, 'इस समय नेवी को तय करने की जरूरत है कि क्या उन्हें तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर की जरूरत है? सतह पर मौजूद किसी भी चीज को सैटलाइट से पकड़ा जा सकता है और मिसाइल उसे तुरंत ध्वस्त कर सकता है। मुझे लगता है कि नेवी को एयरक्राफ्ट कैरियर की बजाय सबमरीन्स की ज्यादा जरूरत है।'

पिछले साल दिसंबर में टाइम्स ऑफ इंडिया ने खबर की थी कि पिछले छह सालों में किसी भी स्वदेशी डिफेंस प्रॉजेक्ट पर काम शुरू नहीं हुआ है। न्यू जेनरेशन स्टेल्थ सबमरीन्स, माइनस्वीपर्स, इन्फैन्ट्री कॉम्बैट वीइकल्स, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, फाइटर जेट्स और दो तरह के लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर्स की प्रॉजेक्ट कीमत लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये है। ये सभी प्रॉजेक्ट या अटक गए हैं या इनके लिए अभी तक फाइनल कॉन्स्टैक्ट ही नहीं हो सके हैं।