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जयपुर में मिसाल-कैंसर पीड़ित हिंदू की मौत, पड़ौसी मुस्लिमों ने दिया अर्थी को कंधा
April 13, 2020 • Rajkumar Gupta


राजेंद्र की मौत पर मुस्लिम समाज के लोग भी हिंदुओं के साथ आगे आए। अर्थी को कंधा देते हुए शव को चांदपोल मोक्षधाम ले गए। वहां अंतिम संस्कार करवाया।

जयपुर. कोरोना वायरस संक्रमण और लॉक डाउन के बीच सोमवार को प्रदेश की राजधानी जयपुर में हिन्दू-मुस्लिम एकता व सांप्रदायिक सौहार्द की अनोखी मिसाल देखने को मिली है। जहां कैंसर पीड़ित एक हिंदू व्यक्ति की मौत होने पर लॉक डाउन की वजह से उनके रिश्ते नातेदार नहीं आ सके। दु:ख की इस घड़ी में घर में पत्नी, बहन व दो बेटे ही मौजूद थे। कैंसर की बीमारी में काफी रुपया खर्च होने से अंतिम संस्कार करने और अर्थी को कांधा देने में परेशानी आ रही थी।

जैसे ही यह बात आसपास के मुस्लिमों को पता चली वे पहुंच गए। इसके बाद मृतक राजेंद्र की अर्थी को कांधा दिया और "राम नाम सत्य है" बोलते हुए चांदपोल मोक्षधाम पहुंचे। जहां हिंदू रीति रिवाज से मृतक का अंतिम संस्कार किया गया। राजधानी जयपुर में गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल देने वाली इस घटना के सैंकड़ों लोग गवाह बने। इस घटना के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। लॉक डाउन के बीच मुस्लिम समुदाय की इस पहल की हर किसी ने सराहना की। 

सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले लोगों को मिलेगा जवाब

स्थानीय निवासी पप्पू व इरफान ने बताया कि मृतक राजेंद्र बागड़ी था। वह लंबे वक्त से कैंसर से पीड़ित चल रहे थे। यहां भट्‌टा बस्ती थाना इलाके में बजरंग नगर में रहते थे। इनके परिवार में सिर्फ पत्नी, दो बेटे व बहन रहती थी। आस-पड़ौस में कोई और रिश्तेदार नहीं रहता था। रविवार देर शाम को कैंसर पीड़ित राजेंद्र ने अंतिम सांस ली। काफी इंतेजार किया। लेकिन लॉक डाउन अंतिम वक्त में अर्थी को कंधा देने वाले परिवार के चार रिश्तेदार भी शामिल नहीं हो सके। 

ऐसे में कॉलोनी में रहने वाले स्थानीय मुस्लिम निवासियों ने राजेंद्र का अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। जिसमें आसपास के हिंदु भी शामिल हुए। पप्पू के मुताबिक राजेंद्र के अंतिम संस्कार से हम सभी को सुकुन मिला। साथ ही, देश प्रदेश में जो ताकतें सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने में लगी हुई है। हिंदू मुसलमान के नाम पर आपसी द्वेष फैलाया जा रहा है। उनको यह करारा जवाब है। 

राजेंद्र की मौत पर मुस्लिम समाज के लोग भी हिंदुओं के साथ आगे आए। अर्थी को कंधा देते हुए शव को चांदपोल मोक्षधाम ले गए। वहां अंतिम संस्कार करवाया।