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कमलनाथ के बाद शिवराज से भी 'माथापच्ची' करा रहे सिंधिया, कहां एडजस्ट होंगे 'बागी' विधायक
April 8, 2020 • Rajkumar Gupta

भोपाल।
ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद उनके समर्थक 22 पूर्व विधायकों ने भी बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। 22 में से 6 लोग तत्कालीन कमलनाथ की सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। इनके इस्तीफे के बाद कांग्रेस की सरकार गिर गई। शिवराज सिंह ने खुद शपथ ले लिया है, लेकिन कोरोना की वजह से मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हुआ है। कहा जा रहा है कि लॉकडाउन के बाद शिवराज कैबिनेट का गठन होगा। मगर कैबिनेट गठन में शिवराज के सामने सिंधिया गुट के लोगों को एडजस्ट करने की मुश्किल है।

मुश्किल ये है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के कांग्रेस छोड़ने वाले ज्यातर लोग ग्वालियर चंबल संभाग के हैं। 22 में से 9 लोग मंत्री पद के दावेदार हैं। उस इलाके से बीजेपी के भी कई बड़े नेता आते हैं। ऑपरेशन लोट्स को अंजाम तक पहुंचाने में उसी संभाग के दो नेताओं की भूमिका बड़ी रही है। साथ ही दूसरे अन्य भी दावेदार हैं जो शिवराज कैबिनेट में जगह चाहते हैं। अब शिवराज सिंह के सामने चुनौती ये है कि अगर एक ही इलाके से बड़ी संख्या में लोगों को मंत्रिमंडल में जगह देते हैं तो आगे चलकर नई मुसीबत खड़ी हो जाएगी। 

एजस्ट करने की चुनौती
यह तय माना जा रहा है कि लॉकडाउन खत्म होते ही शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार करेंगे। मगर बीजेपी के साथ-साथ उस गुट के इतने दावेदार हैं कि सभी को एडजस्ट करना शिवराज के लिए चुनौती है। कमलनाथ की सरकार में उन्हें लेकर कुल 29 लोग थे। ऐसे में माना जा रहा है कि शिवराज सिंह चौहान भी पहले चरण में 24-26 मंत्रियों को शपथ दिलवा सकते हैं। मंत्रिमंडल में किसे जगह मिलेगी इसका फैसला दिल्ली लेगा। साथ ही सिंधिया के साथ भी इसे लेकर चर्चा होगी कि उनके गुट को इन्हें मंत्रिमंडल में जगह दी जाए।

सिंधिया गुट के ये हैं दावेदार
सिंधिया के साथ 22 लोगों ने कांग्रेस से इस्तीफा दिया है, जिसमें 9 लोग मंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं। तुलसी सिलावट, इमरती देवी, प्रद्युमन सिंह तोमर, महेंद्र सिंह सिसोदिया, गोविंद सिंह राजपूत और प्रभुराम चौधरी हैं। ये छह तो कांग्रेस से मंत्री पद छोड़कर आए हैं। इसके बाद हरदीप सिंह डंग और बिसाहूलाल सिंह भी प्रबल दावेदार हैं। क्योंकि कांग्रेस से दोनों मंत्री नहीं बनाए जाने को लेकर ही नाराज थे। बिसाहूलाल सिंह कांग्रेस के काफी वरिष्ठ नेता थे। सिंधिया से पहले उन्होंने बीजीपी सदस्यता ग्रहण की।

दिक्कत क्या है
दावेदारों की लंबी फौज है और मंत्री परिषद में जगह सीमित है। ऐसे में शिवराज के सामने दिक्कत है कि सिंधिया गुट के दावेदारों के साथ उन्हीं इलाकों से उनकी पार्टी के भी कई दावेदार हैं। सीएम के सामने संकट यह है कि एक ही इलाके से कितने लोगों को मंत्रिमंडल में जगह दी जाए। अपने लोगों को इग्नोर करना भी भारी पड़ सकता है। आइए आपको उन जगहों के बारे में बताते हैं, जहां पेंच फंस रहा है।

  • तुलसी सिलावट कांग्रेस की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे, ज्योतिरादित्य सिंधिया के सबसे खास हैं। यह इंदौर के सांवेर सीट से विधायक थे। इनके उपमुख्यमंत्री पद की चर्चा है। मगर इंदौर से ही बीजेपी के ऊषा ठाकुर, रमेश मेंदोला और महेंद्र हार्डिया दावेदार हैं। जबकि यहां से सिर्फ दो लोग ही मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में बीजेपी में असंतोष बढ़ने की संभावना है।
  • मुरैना से बीजेपी के एंदल सिंह कंसाना भी दावेदारी ठोक रहे हैं। सिंधिया खेमे के रघुराज सिंह कंसाना भी मंत्री पद के लिए दावेदारी ठोक रहे हैं।
  • सागर से आने वाले गोविंद सिंह राजपूत को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलनी है। ये कमलनाथ की सरकार में परिवहन मंत्री थे। शिवराज के सामने मुश्किल यह है कि बीजेपी के दो कद्दावर नेता यहां से आते हैं, जिसमें गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह हैं। यहां भी दावेदार तीन हैं, बीजेपी के दोनों लोग पूर्व में मंत्री रह चुके हैं।
  • भांडेर से विधायक रहीं इमरती देवी पूर्ववर्ती सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री थी। इस बार भी उन्हें कैबिनेट में जगह मिलेगी। बीजेपी की तरफ से दतिया विधायक नरोत्तम मिश्रा भी दावेदार हैं। नरोत्तम मिश्रा की भूमिका इस पूरे एपिसोड में काफी अहम है। चर्चा तो यहां तक है कि उन्हें उपमुख्यमंत्री की कुर्सी मिल सकती है।
  • ग्वालियर से प्रद्युम्न सिंह तोमर का नाम भी कैबिनेट मंत्री के लिए तय है। पूर्ववर्ती सरकार में यह खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री थे। बीजेपी की तरफ से दावेदार ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ यशोधरा राजे सिंधिया हैं। अटेर विधायक अरविंद सिंह भदौरिया भी हैं।
  • कमलनाथ की सरकार में श्रम मंत्री रहे महेंद्र सिंह सिसोदिया गुना संसदीय क्षेत्र से आते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया यहीं से लोकसभा चुनाव लड़ते हैं। यहां से बीजेपी की तरफ से दावेदार गोपीलाल जाटव हैं।
  • स्कूली शिक्षा मंत्री रहे प्रभुराम चौधरी सांची से आते हैं, यह रायसेन जिले में पड़ता है। यहां से बीजेपी के रामपाल सिंह का नाम प्रस्तावित है।
  • 25 सीट पर होना है उपचुनाव
    वहीं, मध्यप्रदेश विधानसभा की 25 सीटें अभी खाली हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि अगस्त में शायद इन सीटों पर उपचुनाव हो। ज्यादातर सीटें सिंधिया के गढ़ की हैं। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद शिवराज के सामने चुनौती यह है कि उपचुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीते। तभी सरकार स्मूथली चल सकती है।