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कम्युनिटी ट्रांसमिशन पर सवाल - 70 प्रतिशत मामले सिर्फ 13 शहरों में क्यों?
June 2, 2020 • Rajkumar Gupta

नई दिल्‍ली
भारत में कोरोना वायरस क्‍या कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन की स्‍टेज पर पहुंच चुका है? करीब दो लाख मामले और 5,400 मौतें होने के बाद यह सवाल जोर पकड़ रहा है। एक्‍सपर्ट्स का एक ग्रुप मानता है कि भारत की घनी और मध्यम आबादी वाले इलाकों में कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन शुरू होने की पुष्टि हो चुकी है। सरकार की तरफ से यही कहा जा रहा है कि अभी कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन यानी स्‍टेज 3 शुरू नहीं हुई है। यह भी गौर करने वाली बात है कि देश के 70 फीसदी से ज्‍यादा मामले सिर्फ 13 शहरों में हैं। ऐसे में उनके आधार पर पूरे देश की तस्‍वीर का आंकलन करना कितना सही है?

एक्‍सपर्ट्स ने क्‍या कहा है?
भारतीय लोक स्वास्थ्य संघ , इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन  और भारतीय महामारीविद संघ के एक्‍सपर्ट्स ने एक प्रधानमंत्री को सौंपी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्तर पर कोविड-19 को खत्म करना अवास्तविक जान पड़ता है।' यह रिपोर्ट चौथे लॉकडाउन में दी गई ढील को कोरोना फैलने के लिए जिम्‍मेदार मानती है। इसमें कहा गया है कि 'राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन महामारी के प्रसार को रोकने और प्रबंधन के लिए प्रभावी योजना बनाने के लिए किया गया था ताकि हेल्‍थकेयर सिस्‍टम प्रभावित ना हो। यह हो भी रहा था लेकिन नागरिकों को हो रही असुविधा और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के प्रयास में चौथे लॉकडाउन में दी गई राहतों के कारण ट्रांसमिशन बढ़ा है।'

सिर्फ 13 जिलों में 70% केस, पूरे देश में हालात इतने खराब नहीं
स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने पिछले दिनों बताया था कि देश में कोरोना के 70 पर्सेंट मामले 13 शहरों में हैं। इनमें दिल्ली, मुंबई, चेन्नै, अहमदाबाद, ठाणे, पुणे, हैदराबाद, कोलकाता/हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जोधपुर, चेंगलपट्टु और तिरुवलुर शामिल हैं। इन्‍हीं शहरों पर अब सरकार का फोकस है। बाकी देश में जहां लॉकडाउन में ढील दी जा रही है, यहां पर कंटेनमेंट जोन में सख्‍ती उसी तरह बरकरार रहेगी। दूसरी बात, देश में कोरोना का प्रसार कितना हुआ है, इसको लेकर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की निगरानी में एक सर्वे हो रहा है। उस सर्वे के आंकड़ों से वास्‍तविक हालात का अंदाजा मिलेगा। सरकार भी शायद उसी रिपोर्ट का वेट कर रही है।

सरकार ने महामारी विशेषज्ञों से सलाह नहीं ली: रिपोर्ट
यह रिपोर्ट ये भी कहती है कि महामारी से निपटने के उपाय करते समय महामारीविदों से सलाह नहीं ली गई। रिपोर्ट में कहा गया है , 'भारत सरकार ने महामारीविदों से परामर्श लिया होता जिन्हें अन्य की तुलना में इसकी बेहतर समझ होती है तो शायद बेहतर उपाय किए जाते।' एक्‍सपर्ट्स ने कहा, 'ऐसा लगता है कि मौजूदा सार्वजनिक जानकारी के आधार पर सरकार को चिकित्सकों और अकादमिक महामारी विज्ञानियों द्वारा सलाह दी गई थी।' उन्‍होंने कहा कि भारत इस समय मानवीय संकट और महामारी के रुप में भारी कीमत चुका रहा है।

कोरोना की चार स्टेज

पहला स्टेज- इस स्टेज में संक्रमण सिर्फ उन्हीं लोगों में पाया जाता है, जो किसी वायरस से प्रभावित देश से आते हैं। संक्रमण की रोकथाम का ये सबसे अच्छा वक्त होता है।

दूसरा स्टेज- इस स्टेज को लोकल ट्रांसमिशन स्टेज कहते हैं। इसमें विदेश से लौटे शख्स के परिजन, रिश्तेदार या दोस्त वगैरह संक्रमित होते हैं। इस चरण में ये पता होता है कि वायरस कहां से फैल रहा है और ऐसे में इसकी रोकथाम करना आसान होता है।

तीसरा स्टेज- इसे कम्युनिटी ट्रांसमिशन स्टेज कहा जाता है, जिसमें ऐसे लोग भी संक्रमित होने लगते हैं, जो ना तो किसी देश से लौटे होते हैं और ना ही ऐसे किसी व्यक्ति के संपर्क में होते हैं। ये पता नहीं चल पाता कि आखिर संक्रमण आया कहां से और उस स्थिति में रोकथाम मुश्किल हो जाती है।

चौथा स्टेज- किसी भी महामारी का अंतिम पड़ाव होता है चौथा चरण। इस स्टेज में कोई भी हल निकाल पाना मुश्किल हो जाता है। संक्रमण इतनी तेज फैलता है कि सख्त से सख्त फैसले भी बेअसर होते दिखते हैं।