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कर्नाटक में चौथी सीट पर फंसा राज्यसभा चुनाव का गणित, जोड़तोड़ में जुटीं पार्टियां
June 5, 2020 • Rajkumar Gupta

बेंगलुरु
कर्नाटक में राज्यसभा चुनाव को लेकर मामला फंसता दिख रहा है। राज्य में राज्यसभा की चार सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने के लिए कुछ ही दिन बचे हैं। बावजूद इसके कर्नाटक के तीन प्रमुख राजनीतिक दलों ने अभी तक अपने उम्मीदवारों और रणनीति का खुलासा नहीं किया है। राज्यसभा की चार सीटों में से दो पर बीजेपी और एक पर कांग्रेस की दावेदारी पक्की है। ऐसे में तीसरी सीट के लिए कांग्रेस और जेडीएस गलबहियां करने की जुगत में हैं। उधर, गुजरात में भी राज्यसभा की चौथी सीट को लेकर बीजेपी गुणा-गणित कर रही है। वहां आज ही दो कांग्रेसी विधायकों ने इस्तीफा देकर बीजेपी को बढ़त बनाने का मौका दे दिया है।
कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष समेत 117 सदस्यों के साथ ही बीजेपी चार में से दो सीटों पर जीत पक्की कर सकती है जबकि 68 विधायकों वाली कांग्रेस एक सीट पर जीत हासिल कर सकती है। एक सीट पर जीत हासिल करने के लिए कम से कम 44 मतों की जरूरत होने के चलते कोई भी दल चौथी सीट को अकेले दम पर हासिल नहीं कर सकता है। ऐसे में अटकलें तेज हैं कि कर्नाटक में बीते लोकसभा चुनाव के दौरान गठबंधन सहयोगी रहे कांग्रेस और जद (एस) चौथी राज्यसभा सीट के लिए हाथ मिला सकते हैं।

जेडीएस को कांग्रेस के सहयोग की जरूरत
पार्टी के एक शीर्ष सूत्र के मुताबिक, कांग्रेस पूर्व केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को एक सीट से मैदान में उतार सकती है और वह आसानी से जीत सकते हैं लेकिन अगर जद(एस) प्रमुख एचडी देवेगौड़ा चुनाव लड़ते हैं तो उन्हें समर्थन देने पर विचार किया जा सकता है। जद (एस) के पास केवल 34 विधायक हैं, ऐसे में वह अपने दम पर एक सीट को नहीं जीत सकती और उसे कांग्रेस के समर्थन की जरूरत होगी।

बीजेपी में ये हैं दावेदार
सूत्रों ने मुताबिक, पार्टी शनिवार को अपनी कोर कमेटी की बैठक करने वाली है, जहां वह नामों पर चर्चा करेंगे और इसे सेंट्रल लीडरशिप को बताएंगे। चर्चा है कि प्रभाकर कोरे जहां एक और कार्यकाल की तलाश में हैं, वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार की पत्नी तेजस्विनी और कर्नाटक के पार्टी महासचिव प्रभारी मुरलीधर राव का नाम भी राज्यसभा टिकट के दावेदारों में शामिल है।

उमेश कट्टी ने येदियुरप्पा पर डाला दबाव
कर्नाटक सरकार में मंत्री बनने से रह गए आठ बार के विधायक उमेश कट्टी भी अपने भाई रमेश कट्टी को राज्यसभा भेजने के लिए प्रयास कर रहे हैं। रमेश कट्टी ने पिछले सप्ताह बीजेपी के एक वर्ग के साथ बैठक की थी। जिसमें बीजेपी के भीतर असंतोष की अटकलों की बात सामने आई थी। इसके कुछ दिनों बाद ही उमेश कट्टी ने अपने भाई रमेश के साथ मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा से उनके आधिकारिक निवास पर मुलाकात की। चर्चा है कि बैठक के दौरान कट्टी ने राज्यसभा के लिए अपने भाई के नाम पर विचार करने के लिए मुख्यमंत्री पर दबाव डाला था।