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कोरोना: 11 और मौतें, मुंबई में आखिर इतने लोग मर क्यों रहे हैं?
April 15, 2020 • Rajkumar Gupta

मुंबई
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में मंगलवार को कोरोना वायरस के 204 नए मामले सामने आए और 11 कोरोना मरीजों की मौत हो गई। मुंबई में हर दिन कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते मामले से हड़कंप मचा हुआ है। हर दिन सैकड़ों नए मामले सामने आने के साथ-साथ मौत के आंकड़े भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
मुंबई में हेल्थ सेक्टर तक धराशायी हो गया है। मुंबई में एक के बाद एक अस्पताल कोरोना वायरस की चपेट में आ रहे हैं। कई दिन मरीजों की भर्ती रोक दी गई है। आखिर क्यों मुंबई में कोरोना का कहर बढ़ रहा है और क्यों इतने लोगों की मौत हो रही है?

हेल्थ सेक्टर धराशायी
1753 पॉजिटिव केस और 111 की मौत साफ इशारा है कि देश की आर्थिक राजधानी कोरोना से जंग में क्या अब भी पूरी तरह तैयार नहीं है। मुंबई के 15 बड़े अस्पतालों के हेल्थ वर्कर वायरस की चपेट में आ चुके हैं। जसलोक, ब्रीचकैंडी, खार-हिंदुजा, भाटिया, वॉकहार्ट और सैफी में डॉक्टरों और नर्सों में कोविड-19 संक्रमण पाया गया। भारत की किसी दूसरे शहर के अस्पतालों का इतना बुरा हाल नहीं हुआ होगा।

कस्तूरबा में आईसीयू नहीं
बड़े अस्पतालों के धाराशायी होने के बाद कस्तूरबा अस्पताल अकेले जंग लड़ता दिख रहा है लेकिन बदइंतजामी देखिए, यहां एक भी आईसीयू नहीं है और न ही गंभीर मरीजों को देखने वाले फुल-टाइम सीनियर इंटेसिविस्ट। अब यह किसी से छिपा नहीं है कि कोरोना उन मरीजों के लिए ज्यादा जानलेवा साबित हो रहा है जिन्हें पहले से ही दिल की बीमारी, डायबिटीज या सांस से जुड़ी दिक्कतें है।

सेवनहिल्स में हाउसकीपिंग स्टाफ की कमी
गंभीर मरीजों को सेवनहिल्स अस्पताल में रिफर करने से पहले कई हफ्तों तक कस्तूरबा अस्पताल खुद ही संघर्ष करता रहा। सेवनहिल्स मुंबई का दूसरा सबसे अहम कोविड-19 अस्तपाल है। सेवनहिल्स में भी अलग समस्याएं हैं। यहां अभी 8 बेड वाला आईसीयू ही है जिनके बढ़ाकर 30 किया जाना है। इसके अलावा अस्पताल हाउसकीपिंग स्टाफ की कमी से भी जूझ रहा है, जिससे यहां हाइजीन भी बड़ी चुनौती बन गई है।

क्रिटिकल केयर सुविधा की कमी
मुंबई में कोविड-19 से बढ़ती मौत के आंकड़ों को नियंत्रित करने के लिए नियुक्त की गई टास्क फोर्स का मानना है कि कोरोना अस्पतालों में क्रिटिकल केयर सुविधा में अति शीघ्र ही सुधार की जरूरत है। मंगलवार को जिन 11 की मौत हुई, उनमें से सात 50 से 65 की उम्र के थे जिन्हें हाइपरटेंशन, डायबिटीज जैसी बीमारी थी। इससे भी ज्यादा चिंताजनक यह है कि इन सातों में दो दिन पहले ही कोरोना की पुष्टि हुई थी। यानी कि क्रिटिकल केयर न मिल पाने की वजह से मुंबई में मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है

मुंबई को 500 आईसीयू बेड की जरूरत
संक्रामित रोग विशेषज्ञ एक सीनियर डॉक्टर ने कहा कि जिस तरह से बीएमसी के फैसले लिए, उससे साफ झलकता है कि उनके पास कोई तैयारी ही नहीं थी। डॉक्टर ने बताया कि जब 11 मार्च को मुंबई में पहला केस आया था, उसके एक महीने बाद तक पूरी तरह से आईसीयू सुविधा वाले कोविड-19 अस्पताल नहीं तैयार किया जा सका। इस वक्त मुंबई को 500 से अधिक आईसीयू बेड की जरूरत है। बड़े निजी अस्पताल को आगे आना चाहिए।

अपर नगर आयुक्त सुरेश काकनी का कहना है कि आईसीयू बेड चरणबद्ध तरीके से जोड़े जा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हमारे कोविड-19 सेंटर में 51 वेंटिलेटर हैं जिनमें से 11 कस्तूरबा में हैं।' उन्होंने कहा कि कस्तूरबा में फुल टाइम इंटेसिविस्ट की कमी के चलते केईएम, नायर और सायन अस्पताल के डॉक्टर मदद कर रहे हैं। उन्होंने बताया, 'हम आईसीयू बेड की क्षमता को बढ़ा रहे हैं और प्राइवेट एक्सपर्ट से भी क्रिटिकल केयर मरीजों के इलाज के लिए आग्रह कर रहे हैं।'

अधिक टेस्टिंग भी है मरीजों के बढ़ने की वजह
मुंबई में बढ़ते कोरोना मरीजों के आंकड़ों की एक वजह अधिक टेस्टिंग भी बताई जा रही है। कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए अधिक से अधिक टेस्टिंग की जरूरत क्यों है, इसका अंदाजा मुंबई के आंकड़ों को देखकर लगाया जा सकता है। आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में 12 दिन में कोरोना टेस्टिंग 3 गुना बढ़ाई गई, जिसके कारण नए मरीजों की संख्या में 5 गुना बढ़ोतरी देखने को मिली है।

जितनी अधिक केस, उतनी बढ़ेगी जांच
संक्रमण रोग विशेषज्ञ डॉ. ओम श्रीवास्तव ने कहा कि जितने अधिक केस आएंगे, जांच उतनी बढ़ानी होगी। नाम प्रकशित नहीं करने की शर्त पर महानगर के एक बड़े संक्रामक रोग विशेषज्ञ ने बताया कि वर्तमान स्थिति के अनुसार, मुंबई को रोजना 15 हजार टेस्टिंग की जरूरत है। वहीं, BMC स्वास्थ्य विभाग के अडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर सुरेश काकानी ने कहा, 'BMC हाई रिस्क मरीजों को न केवल अधिक से अधिक ढूंढ रही है, बल्कि उनकी जांच भी कर रही है। यही कारण है कि मामले बढ़ रहे हैं।'