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'कोरोना बम' पर बंगाल! फिर मामले क्यों कम?
April 27, 2020 • Rajkumar Gupta

कोलकाता
हाल ही में केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में कोरोना मामलों के संबंध में असेसमेंट के लिए एक समूह भेजा था। समूह ने निष्कर्ष निकाला है कि बंगाल में कोरोना मामलों की जांच कम हुई है। इसके बावजूद संक्रमण के ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं, जिससे राज्य में कोरोना की स्थिति और अधिक गंभीर होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
केंद्र की ओर से राज्यवार की गई जांच के आधार पर पता चलता है कि दिल्ली, महाराष्ट्र और राजस्थान में कोरोना के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं लेकिन इसके पीछे एक तर्क यह भी है कि इन राज्यों में तेजी के साथ टेस्टिंग की गई है। वहीं पश्चिम बंगाल टेस्टिंग संख्या के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है, लेकिन कोरोना पॉजिटिव मामलों के पर्सेंटेज में काफी आगे है।

केंद्रीय समूह के आंकड़ों से यही पता चलता है कि राज्य में कोरोना के मरीजों की संख्या और अधिक है। एक अधिकारी ने टेस्टिंग के सटीक आंकड़े शेयर करने से इनकार करते हुए इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि पश्चिम बंगाल में किए गए टेस्टों में पॉजिटिव मामलों के पाए जाने की दर राष्ट्रीय दर से काफी अधिक है जो 4.5% है। वहीं यहां अभी तक किए टेस्टों की संख्या बाकी राज्यों के मुकाबले काफी कम है। इस कारण राज्य की स्थिति काफी जटिल है। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे राज्य सरकार कोरोना के सही मामलों और मौतों की संख्या छिपा रही है।

अन्य राज्यों की तुलना में कम टेस्टिंग
रविवार तक पश्चिम बंगाल सरकार के आंकड़ों के अनुसार राज्य में अभी तक 10,893 सैंपल्स लिए जा चुके हैं। 19 लोगों की कोरोना के कारण मौत हो चुकी है, वहीं 26 अप्रैल, 2020 तक राज्य में कोरोना के 461 मामले सामने आ चुके हैं। जबकि अन्य राज्यों में पश्चिम बंगाल के मुकाबले अधिक टेस्टिंग हुई है। जैसे कि कर्नाटक में अभी तक 42,964 सैंपल्स लिए जा चुके हैं जिसमें से केवल 503 ही कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।

इसी प्रकार आंध्र प्रदेश में भी 68,000 से अधिक सैंपल लिए जा चुके हैं और इनमें से 1097 मामले पॉजिटिव पाए गए हैं। महाराष्ट्र में भी अभी तक 1 लाख से अधिक सैंपल लिए जा चुके हैं और करीब 7000 मामले पॉजिटिव पाए गए हैं।

स्थिति भयावह
केंद्र के इस सक्षम ग्रुप की इंटरनल असेसमेंट के आधार पर राज्यों को चार समूहों में रखा जा रहा है। एक तो तेजी के साथ टेस्टिंग करने वाले राज्य, जैसे कि दिल्ली और महाराष्ट्र। जैसे-जैसे अधिक टेस्ट होते हैं, वैसे वैसे पॉजिटिव मामलों का पता चलता है। इससे कोरोना की चेन तोड़ने में मदद मिलती है। दूसरे समूह में लो टेस्टिंग, लो पॉजिटिव वाले राज्य हैं, जैसे केरल।

बताया जा रहा है कि केरल ने शुरुआती स्तर पर ही तेजी से जांच की है जिसके कारण इसे लो टेस्टिंग, लो पॉजिटिव केसेज में मदद मिली है। तीसरे परिदृश्य में हाई टेस्टिंग-लो पॉजिटिव केसेज वाले राज्य हैं। यह स्थिति वहां है जहां किसी राज्य ने एकबार तेजी से टेस्ट कर लिए हों। चौथा और सबसे चिंताजनक परिदृश्य 'लो टेस्टिंग एंड हाई पॉजिटिव केसेज' का है। यही वह स्थिति है जहां पश्चिम बंगाल अभी है।