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कोरोना का ऐसा राज़ जो दुनिया शायद ही जाने! 
April 20, 2020 • Rajkumar Gupta

नई दिल्‍ली
दुनियाभर में एक लाख 60 हजार से ज्‍यादा लोग कोरोना वायरस की वजह से मारे जा चुके हैं। यह संख्‍या असल में इससे कहीं ज्‍यादा हो सकती है। ऐसे सबूत सामने आ रहे हैं कि वायरस केवल फेफड़ों को ही नहीं, दिल, गुर्दा और शरीर के अन्‍य अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है। अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC) ने एडवायजरी जारी की है कि जहां टेस्‍ट में इन्‍फेक्‍शन नहीं कन्‍फर्म हुआ, उन्‍हें भी कोरोना से मौतों में गिना जाए। कई देश अब यह मानने लगे हैं कि COVID-19 से होने वाली मौतें कम गिनी जा रही हैं। यानी जो आधिकारिक आंकड़े हैं उनमें शायद कई लोगों की मौत को शामिल ही नहीं किया जा रहा। एक्‍सपर्ट्स कहते हैं कि ऐसा भारत के केस में भी हो सकता है।

भारत में लाखों मौतों का नहीं कोई हिसाब
कोरोना वायरस तो अभी आया है, मगर भारत में केवल 22 फीसदी मौतें ही मेडिकल सर्टिफाइड होती हैं। लगभग 10 लाख मौतें तो रिकॉर्ड में आती ही नहीं। भारत में जन्‍म और मृत्‍यु के चीफ रजिस्‍ट्रार का अनुमान है कि 2017 में 70 लाख मौतें हुई जिनमें से करीब 60 लाख रजिस्‍टर्ड हुईं। इनमें से केवल 14.1 लाख यानी करीब 22 फीसदी को ही मेडिकल सर्टिफाई किया गया था। ऐसे में कोरोना से होने वाली मौतें भी अंडरकाउंट हो सकती हैं। ना सिर्फ कोरोना, बल्कि अन्‍य वजहों से मरने वाले लोगों का आंकड़ा भी शायद रिकॉर्ड में जगह नहीं पा सके क्‍योंकि COVID-19 पर फोकस है।

अस्‍पताल से इतर मौत तो कोई रिकॉर्ड नहीं
भारत के सबसे बड़े महामारीविदों में से एक, डॉ. जयप्रकाश मुलियन कहते हैं कि अगर पेशेंट की मौत अस्‍पताल में ना हो तो ये पता लगाने का कोई रास्ता नहीं है कि मौत COVID-19 से हुई। उन्‍होंने कहा, "भारत में मौतों की रिपोर्ट‍िंग हमेशा से एक समस्‍या रही है, मौत की वजह का पता लगाना भी बड़ी समस्‍या है। भारत में हमारे पास हर चीज का क्राइटेरिया है। चेन्‍नई ने कुछ साल पहले मलेरिया का खात्‍मा उससे होने वाली मौतों को बुखार से मौत बताकर किया। कॉलरा खत्‍म करने के लिए कोलकाता ने ऐसी मौतों को गैस्‍ट्रोएन्‍टेरिटिस में क्‍लासिफाई करने का फैसला किया।"

क्‍यों ये बना मुद्दा
ऐसी चर्चा है कि 'रीक्‍लासिफिकेशन' के जरिए मौतों के आंकड़े को कम किया जा सकता है। कुछ राज्‍यों से रिपोर्ट्स हैं कि अस्‍पतालों पर दबाव बनाया जा रहा है कि COVID-19 से मौतों का आंकड़ा कम रखने के लिए कुछ मौतों की प्राइमरी वजह बदल दी जाए। इसी के बाद यह बहस शुरू हुई है कि मरीज COVID के चलते मरा या COVID के साथ। पश्चिम बंगाल ने एक एक्‍सपर्ट कमेटी बनाई है जो तय करेगी कि कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीजों की मौत असल में वायरस से हुई है या नहीं। मुंबई के म्‍यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ने भी फैसला किया है कि कोरोना की सभी संदिग्‍ध मौतों को कन्‍फर्म करने से पहले ऑडिट किया जाएगा।वुहान, न्‍यू यॉर्क ने बदले आंकड़े
चीन के वुहान से ही कोरोना पूरी दुनिया में फैला। शुक्रवार को मौतों की संख्‍या का रिवाइज्‍ड आंकड़ा जारी किया गया जिसमें 50 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला। वुहान में 3,869 लोगों की मौत हुई है, ऐसा चीन का कहना है। पिछले हफ्ते ही न्‍यू यॉर्क ने भी मौतों के आंकड़े में अचानक 3,778 केस और जोड़ दिए। इसमें उन लोगों की मौत भी शामिल थी जिनके COVID-19 इन्‍फेक्‍टेड होने का शक था मगर टेस्‍ट नहीं किया गया था। यूनाइटेड किंगडम में भी मौतों की संख्‍या में हजारों का इजाफा हो सकता है अगर नर्सिंग होम में हुई मौतें COVID-19 की वजह से हुईं, ये कन्‍फर्म हो जाए।