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कोरोना काल में महाराष्ट्र और गुजरात में क्यों ठनी?
May 3, 2020 • Rajkumar Gupta

मुंबई
अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सेवा केंद्र (आईएफएससी) को मुंबई से गुजरात के गांधीनगर में स्थानांतरित करने की खबर से महाराष्ट्र की राजनीति में आरोपा-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सत्ताधारी दल कांग्रेस-एनसीपी ने जहां इसके लिए बीजेपी को घेरा, वहीं बीजेपी ने इसका पूरा दोष कांग्रेस-एनसीपी पर मढ़ा है। कोरोना की लड़ाई के बीच इस खबर से राजनीतिक गलियारों में हलचल है।

गौरतलब है कि सभी वित्तीय सेवाओं को विनियमित करने के लिए सरकार ने आईएफएससी शुरू करने की घोषणा की थी। अब इसका मुख्यालय गुजरात के गांधीनगर में होगा। पहले इसे मुंबई में बनाया जाने वाला था। एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार का कहना है कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का महत्व कम करने के लिए मोदी सरकार ने आईएफएससी को मुंबई से गांधीनगर स्थानांतरित किया है। पवार ने कहा कि हम प्रधानमंत्री मोदी से कह रहे हैं कि वे एक बार अपने फैसले पर फिर से विचार करें। देश की आर्थिक राजधानी का दर्जा मुंबई को बनाए रखें।

दिल्ली को मिलने वाला मुंबई का पैसा रोक देंगे: शेवाले
केंद्र सरकार के इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए शिवसेना के सांसद राहुल शेवाले ने कहा कि अगर आईएफएससी मुंबई में नहीं बना तो मुंबई से दिल्ली को मिलने वाले टैक्स कलेक्शन को रोक दिया जाएगा। मुंबई देश की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र है, इसलिए आईएफएससी गुजरात की बजाय मुंबई में ही बनाया जाना चाहिए।

प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह महाराष्ट्र के साथ सरासर धोखा है। उन्होंने कहा कि 2007 में डॉ. एम बालचंद्रन समिति ने बीकेसी में आईएफएससी मुख्यालय बनाने की सिफारिश की थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सावंत ने इसके लिए बीजेपी नेताओं को भी जिम्मेदार ठहराया है।

कांग्रेस-एनसीपी अपने गिरेबान में झांके: फडणवीस
इस मसले पर बीजेपी ने कांग्रेस-एनसीपी को घेरा। बीजेपी ने कहा कि पहले सत्ताधारी दल अपने गिरेबान में झांककर देखे। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि आईएफएससी की स्थापना को लेकर 2007 में तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी।

2014 तक इस पर न तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार ने कोई प्रस्ताव पेश किया और न ही केंद्र सरकार ने ध्यान दिया। 2007 में ‘वाइब्रेंट गुजरात’ सम्मेलन के दौरान गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद में आईएफएससी विकसित करने का फैसला लिया था। इसके लिए ईसीआईडीआई का गठन भी कर दिया गया था।

ईसीआईडीआई ने 2012 तक सभी प्रारूप तैयार कर काम भी शुरु कर दिया था। 2015 में केंद्र सरकार ने आईएफएससी को लेकर गिफ्ट सिटी अहमदाबाद का प्रस्ताव पेश किया। उसी समय मुंबई के लिए भी प्रस्ताव पेश किया गया।

मुंबई के बीकेसी में दी जानी थी 50 हेक्टेयर, आई तकनीकी अड़चन
अहमदाबाद के प्रस्ताव के संबंध में सभी औपचारिकताओं को पूरा किया गया, जिससे उसे मंजूरी मिल गई। वहीं दूसरी तरफ 50 हेक्टेयर की जगह बीकेसी में दी जाने वाली थी, जहां तकनीकी अड़चन आ गई। इस पर जरूरी सलाह लेकर फिर से प्रस्ताव पेश किया गया। बुलेट ट्रेन स्टेशन बीकेसी में प्रस्तावित होने के कारण केंद्र सरकार ने यहीं पर आईएफएससी बनाने का विचार किया था।

इस बीच अहमदाबाद के गिफ्ट सिटी में कामकाज शुरू हो गया। उस वक्त के वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि दो आईएफएससी एक साथ काम कर सकते हैं क्या? यह बात विचाराधीन है। पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि आज जो लोग आरोप लगा रहे हैं, वे 2007 से 2014 तक चुप क्यों थे।