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कोरोना: कई राज्यों के मुख्यमंत्री नीतीश को क्यों घुमा रहे हैं फोन?
April 18, 2020 • Rajkumar Gupta

नई दिल्ली

लॉकडाउन के बाद देश के कई राज्यों से प्रवासी मजदूर अपने घरों को लौट गए हैं। ये मजदूर पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली समेत तमाम राज्यों में मजदूरी करके अपना जीवनयापन करते थे। इन मजदूरों के घर लौट जाने से राज्यों को बहुत अधिक चिंता सता रही है। खेती किसानी, निर्माण कार्य और भी कई कामों के लिए कई राज्य इन प्रवासी मजदूरों पर बहुत अधिक निर्भर रहते हैं और अब उनके लौट जाने के बाद इन लोगों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। इन राज्यों के मुख्यमंत्री अब उन प्रवासी मजदूरों को वापस लाने का प्रयास कर रहे हैं, जो या तो अन्य राज्यों जैसे कि बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और ओडिशा में अपने घरों को लौट गए हैं या फंसे हुए हैं।

पंजाब के सीएम ने किया फोन
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अनुरोध किया वो बिहार के मजदूरों को उनके प्रदेश भेज दें। उन्होंने कहा कि जो प्रवासी मजदूर पंजाब में हैं उन्हें वापस रहना चाहिए और राज्य सरकार उनकी देखभाल करेगी। जो लोग वापस आ गए हैं वो लॉकडाउन समाप्त होने के बाद वापस काम पर लौटने के लिए स्वागत किया जाता है।

बादल ने माना, मजदूरों पर टिकी है खेती
पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने ईटी (इकॉनॉमिक टाइम्स) को बताया, "हमें वर्तमान गेहूं की फसल में कोई समस्या नहीं है, लेकिन मेरी चिंता आगामी धान की फसल है, जो पूरी तरह से प्रवासी श्रमिक बल पर निर्भर है।" "जो लोग यहाँ पंजाब में हैं, किसी को भी किसी समस्या या भूख का सामना नहीं करना पड़ेगा क्योंकि यह सबको खिलाना हमारी संस्कृति का हिस्सा है।" बादल ने स्वीकार किया कि पंजाब में कृषि और उद्योग प्रवासी मजदूरों पर बहुत निर्भर करता है।

तेलंगाना भी परेशान
केवल पंजाब ही नहीं तेलंगाना भी इससे परेशान है। तेलंगाना के मुख्य सचिव, सोमेश कुमार ने हाल ही में बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी से बात की, उनसे अनुरोध किया कि वे राज्य की चावल मिलों में काम करने के लिए मजदूरों को वापस लौटने के लिए कहें। यहां तक कि उन्होंने उन्हें बस से तेलंगाना लाने की पेशकश की और वादा किया कि उनकी हर चीज का ध्यान रखा जाएगा।

सीएम राव बोले- आप कहें तो हम बस से बुलवा लें
इससे पहले मार्च में, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने संवाददाताओं से कहा था कि राज्य के मुख्य सचिव बिहार के मुख्य सचिव से बात करेंगे और श्रमिकों को वापस भेजने का अनुरोध करेंगे। राव के अनुसार, तेलंगाना की चावल मिलों में 95% श्रमिक बिहार से हैं। इन मजदूरों की अनुपस्थिति तेलंगाना के लिए मुश्किल खड़ी करेगी जिसका उद्देश्य इस बार किसानों से रिकॉर्ड धान की खरीद करना है।

उद्योगपति कर रहे फोन
मोदी ने ईटी को बताया, 'मुझे राजस्थान के उद्योगपतियों से भी फोन आ रहे हैं, जो राज्य में फंसे बिहारी कामगारों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।' "उनकी चिंता यह है कि एक बार लॉकडाउन के बाद ये श्रमिक बिहार चले जाते हैं, तो वे कम से कम छह महीने तक उद्योग शुरू नहीं कर पाएंगे।"