ALL Rajasthan
कोरोना के कारण महंगा होगा टीवी, फ्रिज, दवा समेत कई चीजों
April 8, 2020 • Rajkumar Gupta

नई दिल्ली
चीन के कोरोना वायरस के खतरे से उबरने की खबरों के बीच एक और ऐसी खबर आ रही है, जो भारत को डरा रही है। यह खबर है चीनी सप्लायरों द्वारा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स से जुड़े साजो-सामानों की कीमत बढ़ाने की। इससे भारत जैसे देश के निर्माताओं को अपने उत्पाद का दाम बढ़ाने का पर मजबूर होना पड़ेगा क्योंकि यहां के उत्पादक 70 फीसदी तक कच्चा माल चीन से मंगाते हैं।

टीवी के पैनल 15 फीसदी महंगे
उद्योग संगठन फिक्की ने भारत सरकार को दिए एक प्रजेंटेशन में कहा है कि चीन के सप्लायरों ने टेलीविजन पैनल की कीमतों में जहां 15 फीसदी की बढ़ोतरी की है, वहीं कंपोनेंट की कीमत में दो फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। इससे न सिर्फ घरों में काम आने वाले सामानों की कीमत बढ़ जाएगी बल्कि टीवी, फ्रिज, एसी, वाशिंग मशीन बनानाा सब महंगा हो जाएगा। इस वजह से लॉकडाउन से निकलने के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था को एक अलग तरह की दिक्कतों से जूझना होगा।

सरकार 9-10 लाख करोड़ रुपये का पैकेज दे
फिक्की का कहना है कि अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए भारत सरकार उद्योग जगत को करीब 9-10 लाख करोड़ रुपये का स्टिमुलस पैकेज दे। यह सुझाव ऐसे समय आया है, जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था लॉकडाउन से निकलने के बाद एक बार फिर से आर्थिक गतिविधियां शुरू करने की तैयारी कर रही है।

चीन से 70 फीसदी तक कच्चे माल का आयात
इस समय भारतीय कंज्यूमर ड्यूरेबल्स गुड्स उद्योग को देखें तो यहां 70 कच्चे माल चीन से ही आते हैं। यही नहीं, यहां के उत्पादक तो 45 फीसदी सामान कंप्लीटली बिल्ड यूनिट (सीबीयू) के रूप में मंगाते हैं। ऐसे में निश्चित है कि टेलीविजन, एयर कंडीशनर, म्यूजिक सिस्टम, वाशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर आदि का कीमत बढ़ना तय है। यह भी महत्वपूर्ण है कि कच्चे माल की कीमत में बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जबकि घरेलू बाजार में इन वस्तुओं की कीमतें घट रही हैं। ऐसे में कंपनियां सामानों का दाम किस तरह से बढ़ा पाती हैं, यह देखना होगा।

एपीआई भी हुआ है महंगा
प्रजेंटेशन में बताया गया कि चीन ने कुछ एक्टिव फार्मा इंग्रेडिएंट -एपीआई- की कीमतों में भी 40 से 50 फीसदी तक का इजाफा कर दिया है। एपीआई का उपयोग दवाओं के निर्माण में होता है। उल्लेखनीय है कि भारत में कुछ ही कंपनियां ऐसी हैं जो कि यहीं एपीआई का निर्माण करती हैं। शेष कंपनियां तो दूसरे देशों, खास कर चीन से ही एपीआई मंगाती हैं।