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कोरोना के खिलाफ देश में उम्मीद जगा रहीं ये दवाएं
May 7, 2020 • Rajkumar Gupta

नई दिल्ली
कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी Covid-19 का अभी तक न तो कोई निश्चित इलाज है और न ही इसकी कोई वैक्सीन बन पाई है। यही वजह है कि दुनियाभर में कोरोना के मरीजों के इलाज में उन दवाओं का इस्तेमाल हो रहा है जो दूसरी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होती हैं। भारत में तो ऐसी एक नहीं, बल्कि कई दवाओं का इस्तेमाल हो रहा है जो कोरोना के खिलाफ जंग में उम्मीद जगा रही हैं। दूसरी बीमारियों के इलाज के लिए बनीं कई दवाएं कोविड-19 मरीजों पर काफी असर करती दिख रही हैं।

कोरोना मरीजों में अलग-अलग लक्षणों, उनकी गंभीरता के हिसाब से अलग-अलग बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का इस्तेमाल हो रहा है। इसी कड़ी में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने बुधवार को एचआईवी/एड्स की दवा के एक कॉम्बिनेशन Lopinavir/ritonavir को कोरोना मरीजों पर मंजूरी दे दी। इसके लिए ICMR ने दिशानिर्देश और प्रोटोकॉल जारी किया है कि किन मरीजों में और किन परिस्थितियों में इसका इस्तेमाल हो सकता है।

Lopinavir/ritonavir इकलौती ऐसी दवा नहीं है, जिसका देश में कोरोना मरीजों के इलाज में इस्तेमाल हो रहा है। आईसीएमआर ने लेप्रसी, इबोला, चर्मरोग, मलेरिया, आर्थराइटिस, डायरिया और शराब की लत जैसी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दर्जन भर से अधिक दवाओं का भी कोविड-19 के मरीजों के इलाज में इस्तेमाल हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक इनमें से कुछ दवाओं का अभी भारत में क्लीनिकल ट्रायल हो रहा है।

HIV/AIDS
Lopinavir/ritonavir एक कॉम्बिनेशन दवा है जिसका एचआईवी/एड्स के इलाज में इस्तेमाल होता है। कोरोना परिवार के ही दो वायरसों सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिन्ड्रोम (SARS) और मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिन्ड्रोम (MERS) के खिलाफ इस दवा का इस्तेमाल हो चुका है। आईसीएमआर ने अब कोविड-19 में इसके इस्तेमाल की इजाजत दे दी है। हालांकि, यह दवा सिर्फ उन्हीं मरीजों को दी जा सकती हैं जिनमें सांस लेने में बहुत ज्यादा दिक्कत जैसे लक्षण हों या वे बुजुर्ग मरीज जो साथ में दूसरी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हों। इस दवा के इस्तेमाल से पहले मरीज से इसके लिए लिखित इजाजत जरूरी है।

चर्मरोग
त्वचा रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली बॉयोकॉन की दवा Itolizumab का भी कोरोना के मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होता है। यह दवा ऐंटी-इन्फ्लेमेटरी है। इसे कोरोना के मध्यम से गंभीर श्रेणी के मरीजों पर किया जा रहा है। इसका मुंबई और दिल्ली में ट्रायल हो रहा है।

आर्थराइटिस
Tocilizumab का इस्तेमाल आर्थराइटिस के इलाज में किया जाता है। यह इम्यून सिस्टम को बढ़ाने वाली होती है। यह दवा कोविड-10 के गंभीर मरीजों में होने वाली बहुत ज्यादा जलन को रोक सकती है। इसका देश में अभी क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है।

लेप्रसी
Mycobacterium w नाम की दवा का इस्तेमाल लेप्रसी यानी कुष्ठ रोग में होता है। हालांकि, बाद में सिवियर ब्लड इन्फेक्शन जैसे मामलों में इम्यून सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए भी इसका इस्तेमाल होने लगा। इसकी तरह कैडिला की Sepsivac भी लेप्रसी में इस्तेमाल होती है। हालांकि, कोरोना के मरीजों पर इन दवाओं का टेस्ट हो रहा है। अभी पीजीआई चंडीगढ़ और भोपाल एम्स में इनका क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है।

शराब की लत
Disulfiram का इस्तेमाल शराब की बेइंतहा लत वाले मरीजों पर किया जाता है ताकि उनकी शराब पर निर्भरता खत्म हो सके। इस दवा को कोरोना परिवार के दो अन्य वायरसों SARS और MERS के खिलाफ किया जा चुका है, जिसमें यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सफल रही थी। हालांकि, कोविड-19 में यह कितनी कारगर है, अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

डायरिया
कोरोना के कई मरीजों में आंत में जलन जैसे लक्षण भी दिख रहे हैं। इस वजह से ऐसे मरीजों पर डायरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा Loperamide को ट्राइ करने पर विचार चल रहा है।