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कोरोना मामले की जांचः चीन पर निशाना, भारत पर निगाहें-अगले हफ्ते विश्व स्वास्थ्य संगठन) के एग्जिक्यूटिव बोर्ड का चेयरमैन बनेगा भारत
May 17, 2020 • Rajkumar Gupta

नई दिल्ली
भारत अगले हफ्ते विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एग्जिक्यूटिव बोर्ड का चेयरमैन बनने जा रहा है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें भारत पर टिकी होंगी कि वह कोरोना के मुद्दे पर चीन के खिलाफ उठ रही आवाजों से कैसे निपटता है। कई देशों का आरोप है कि चीन ने इस महामारी के बारे में दुनिया को अंधेरे में रखा। यही वजह है कि उसके खिलाफ जांच की मांग की जा रही है।
भारत डब्ल्यूएचओ में जापान की जगह लेगा। इस वैश्विक संस्था के साउथ-ईस्ट एशिया ग्रुप ने सर्वसम्मति से इस पद के लिए भारत के नाम का प्रस्ताव रखा था। भारत एग्जिक्यूटिव बोर्ड की अगली मीटिंग में यह पद संभालेगा। इसमें डब्ल्यूएचओ के 194 सदस्य देश और पर्यवेक्षक हिस्सा लेंगे। भारत ऐसे समय यह पद संभालने जा रहा है जब चीन और अमेरिका के बीच कोरोना के मुद्दे पर तनाव चल रहा है। कई दूसरे देशों ने भी इस मुद्दे पर चीन के रुख का विरोध किया है।

चीन के वुहान से शुरुआत
कोरोना की शुरुआत चीन के वुहान से हुई थी और अब इसने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। पूरी दुनिया में करीब 45 लाख लोग इसकी चपेट में हैं और 3 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस और जर्मनी चीन के खिलाफ जांच कर सकते हैं। इन देशों के नेताओं का साफतौर पर कहना है कि वे इस मामले में जांच चाहते हैं। वे जानना चाहते हैं कि यह वायरस कहां से आया, क्या चीन ने शुरुआत में इसके बारे में जानकारी छिपाने की कोशिश की और क्या चीन ने दुनिया को यह आगाह करने में देर की कि यह वायरस इंसान से इंसान में ट्रांसमिट होता है।

डब्ल्यूएचओ पर चीन को बचाने का आरोप
हाल में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि कोरोना वायरस प्राकृतिक नहीं है और इसे लैबोरेटरी में तैयार किया गया था। भारत की ओर से कोरोना मामले पर यह पहला आधिकारिक बयान था। भारत डब्ल्यूएचओ में सुधार की वकालत करता रहा है।

कोरोना मामले में डब्ल्यूएचओ की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। उस पर आरोप लग रहे हैं कि वह इस मामले में चीन का गुणगान करता रहा जबकि चीन ने इसके बारे में उठने वाली आवाजों को दबाया और इसके बारे में दुनिया को जानकारी नहीं दी। डब्ल्यूएचओ के प्रमुख डॉ. टेड्रोस एडहेनॉम पर भी चीन के गुनाहों को छिपाने का आरोप लग रहा है और उनसे इस्तीफा मांगा जा रहा है।

अमेरिका और चीन में बढ़ती तनातनी
इस बीच अमेरिका और चीन के बीच तनातनी बढ़ गई है। अमेरिका का राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर यह साबित हो गया कि चीन ने जानबूझकर इस बारे में जानकारी छिपाई तो उसे इसके नतीजे भुगतने होंगे। उनका कहना है कि चीन के प्लेग ने दुनिया पर हमला किया है। उनका इशारा इस तरफ है कि यह वायरस वुहान की एक लैब से आया है।

हालांकि चीन ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उसका कहना है कि वह WHO की जांच में सहयोग के लिए तैयार है लेकिन उन देशों की जांच स्वीकार नहीं करेगा जो इस मुद्दे का राजनीतिकरण करना चाहते हैं। WHO के संविधान के मुताबिक वह अनसुलझे विवादित मामलों को हेग में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में भेज सकता है।