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लॉकडाउन के 6 दिन / सड़कों पर अब तक 34 मौतें; इनमें से 29 मजदूर, क्योंकि वे भूख-प्यास से परेशान होकर पैदल ही घर के लिए निकल पड़े
March 30, 2020 • Rajkumar Gupta

नई दिल्ली. कोरोनावायरस को रोकने के लिए देश में 21 दिन का लॉकडाउन है। ये लॉकडाउन 24 मार्च की रात 12 बजे से शुरू हुआ और 14 अप्रैल तक चलेगा। इसका सबसे ज्यादा असर उन मजदूरों पर पड़ा है, जो बेहतर जिंदगी की तलाश में अपने गांवों से बड़े शहरों की ओर गए थे। पर, लॉकडाउन के कारण इन मजदूरों के लिए खुद और परिवार के खर्च निकाल पाना मुश्किल हो गया। जब सब बंद हो गया, तो ये मजदूर भूख-प्यास की परवाह किए बगैर पैदल ही अपने-अपने गांवों की ओर निकल पड़े। इस सफर में कई लोगों को जान तक गंवानी पड़ गईं।

किसी को ट्रक-टैम्पो ने टक्कर मार दी, तो किसी ने चलते-चलते दम तोड़ दिया। लॉकडाउन के छह दिन हुए हैं और अब तक कम से कम 34 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें से 29 तो मजदूर ही हैं। इनके अलावा 5 लोगों की मौत हुई, उनमें से किसी को लॉकडाउन के कारण पुलिस ने जाने नहीं दिया, तो किसी बुजुर्ग को अस्पताल से घर जाने के लिए कोई ऑटो रिक्शा या बस नहीं मिली, तो वो पैदल ही चल पड़े और उनकी मौत हो गई।

कोरोना से नहीं, लेकिन कोरोना की वजह से हुई मौतें

तारीख : 25 मार्च

मौतें : 4
लॉकडाउन की वजह से पहली मौत तमिलनाडु में हुई थी। केरल में काम करने वाले 10 मजदूर अपने घर तमिलनाडु लौट रहे थे। इन मजदूरों ने घर जाने के लिए तमिलनाडु के थेनी में बने जंगल का रास्ता चुना। तभी जंगल में आग लग गई। इस आग में दादी के. विजयामनी (43) और उनकी 1 साल की पोती की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद वी. मंजुला (46) और एस. माहेश्वरी (43) ने बाद में दम तोड़ दिया था। 

दिल्ली-यूपी बॉर्डर के पास एनएच-24 से अपने गांव जाते प्रवासी मजदूर।


तारीख : 27 मार्च

मौतें : 8
हैदराबाद के पेड्डा गोलकंडा के पास हुए एक सड़क हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई थी। इन 8 लोगों में एक 18 महीने का बच्चा और एक 9 साल की बच्ची भी थी। ये लोग एक ट्रक में बैठकर तेलंगाना से कर्नाटक अपने घर जा रहे थे। लेकिन रास्ते में ही एक लॉरी ने पीछे से टक्कर मार दी, जिसमें इनकी मौत हो गई।


तारीख : 28 मार्च

मौतें : 4
मुंबई में चाय की दुकान और कैंटीन में काम करने वाले 7 दिहाड़ी मजदूर लॉकडाउन के बाद पैदल ही अपने घर राजस्थान के लिए निकल पड़े। इन मजदूरों को पहले गुजरात बॉर्डर पार करने से रोक दिया गया था। लेकिन, अगले दिन इन्होंने फिर पैदल चलना शुरू कर दिया। तभी मुंबई से सटे विरार में मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर एक ट्रक ने इन्हें टक्कर मार दी, जिसमें 4 मजदूरों की मौत हो गई। इनकी पहचान रमेश भट्ट (55), निखिल पांडे (32), नरेश कालुसुवा (18) और लौराम भगौरा (18) के रूप में हुई।

तस्वीर लखनऊ की है, जहां दिल्ली से आए प्रवासी मजदूर अपने घर जाते हुए।


तारीख : 28 मार्च

मौतें : 6
महाराष्ट्र से गुजरात अपने घर जा रहे 4 प्रवासी मजदूरों को मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर पारोल गांव के पास एक टैम्पो ने पीछे से टक्कर मार दी। इस हादसे में चारों की मौत हो गई। इसी दिन गुजरात के वलसाड जिले में दो महिला मजदूर जब रेलवे ट्रैक पार कर रही थीं, तभी मालगाड़ी ने उन्हें कुचल दिया। उन दोनों महिलाओं की जान नहीं बच सकी।


तारीख : 28 मार्च

मौत : 1
39 साल के रणवीर सिंह दिल्ली में एक निजी रेस्टोरेंट में डिलीवरी बॉय का काम करते थे। लॉकडाउन के बाद रणवीर दिल्ली से मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के लिए पैदल ही निकल पड़े। वे 200 किमी तक जा भी चुके थे, लेकिन रास्ते में ही आगरा पहुंचते ही उनकी मौत हो गई। रणवीर मुरैना के बादफरा गांव के रहने वाले थे। उनके तीन बच्चे हैं।

दिल्ली से मुरैना की दूरी करीब 300 किमी है। इस दूरी को नजरअंदाज करते हुए पैदल निकल गए थे रणवीर।


तारीख : 29 मार्च

मौतें : 5
अपने गांव के लिए पैदल ही दिल्ली से निकले 8 मजदूरों को कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे पर 8 मजदूरों को एक ट्रक ने कुचल दिया। इस हादसे में 5 की मौत हो गई। मरने वालों में एक बच्चा भी था।


तारीख : 29 मार्च

मौत : 1
हरियाणा के सोनीपत से उत्तर प्रदेश के रामपुर में अपने गांव पैदल जा रहे 26 साल के नितिन कुमार को मुरादाबाद के पास एक बस ने टक्कर ने मार दी। नितिन की मौके पर ही मौत हो गई। नितिन अपने छोटे भाई पंकज के साथ घर जा रहे थे। 


वो लोग जिन्हें लॉकडाउन ने मार डाला
तारीख : 26 मार्च

जगह : पश्चिम बंगाल
32 साल के लाल स्वामी घर से दूध लेने के लिए निकले थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लॉकडाउन के बावजूद घर से बाहर निकलने पर पुलिस ने उनकी पिटाई की। लाल स्वामी हार्ट पैशेंट थे और पिटाई की वजह से कुछ समय बाद ही उनकी मौत हो गई।


तारीख : 26 मार्च

जगह : कर्नाटक-केरल बॉर्डर
केरल के मंजेश्वर में रहने वाले 60 साल के अब्दुल हामिद को हार्ट अटैक के बाद कर्नाटक के मंगलुरु ले जाया जा रहा था, लेकिन कर्नाटक पुलिस ने उन्हें बॉर्डर क्रॉस करने की इजाजत नहीं दी। हामिद के भतीजे इब्राहिम ने पुलिस से मिन्नतें भी कीं, लेकिन पुलिस ने जाने नहीं दिया। आखिरकार हामिद की मौत हो गई। 

तस्वीर केरल के कोच्चि की है। यहां लॉकडाउन के दौरान जगह-जगह पुलिस खड़ी है।


तारीख : 28 मार्च

जगह : गुजरात
62 साल के गंगाराम सूरत के एक अस्पताल से अपने घर पैदल जा रहे थे। क्योंकि लॉकडाउन की वजह से ट्रांसपोर्ट भी बंद था, इसलिए वे 8 किमी पैदल ही निकल पड़े। अपने घर के पास ही गंगाराम बेहोश हो गए और जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया, तो वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।


तारीख : 29 मार्च

जगह : कर्नाटक-केरल बॉर्डर
केरल के कासरगोड से कर्नाटक के मंगलुरु जा रही एक एंबुलेंस को पुलिस ने जाने से रोक दिया। इस एंबुलेंस में केरल के कासरगोड में रहने वालीं 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला थीं। उनकी अचानक तबियत खराब होने की वजह से कर्नाटक लाया गया था। लेकिन एंबुलेंस को रास्ता नहीं दिए जाने से महिला की मौत हो गई।


तारीख : 29 मार्च

जगह : बिहार
आरा जिले के जवाहर टोला में रहने वाले राहुल की मौत भूख की वजह से हो गई। राहुल सिर्फ 11 साल का था। उसके पिता दिहाड़ी मजदूर हैं। लेकिन, लॉकडाउन की वजह से वे कई दिनों से घर पर ही बेरोजगार बैठे थे।