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मुंबई: ऑक्सीजन सपोर्ट पर कोरोना मरीज, Itolizumab दवा से जान बचाने में जुटे डॉक्टर
May 3, 2020 • Rajkumar Gupta

मुंबई
कोरोना वायरस जहां धीरे-धीरे अपने पैर पसारता जा रहा है, वहीं चिंता की बात है कि अभी तक इसकी कोई स्पेसिफिक दवा या वैक्सीन नहीं बन पाई है। ऐसे में जिन संभावित दवाओं से इलाज की उम्मीद है, दुनियाभर के डॉक्टर उन्हीं से इलाज कर रहे हैं। ऐसा ही प्रयोग मुंबई के केईएम अस्पताल में एक 35 वर्षीय कोरोना मरीज पर किया गया, जिसे त्वचा रोग के इलाज के लिए दी जाने वाली दवा दी गई।

Itolizumab नाम की इस दवा को बेंगलुरु स्थित दवा कंपनी बायोकॉन बनाती है। इसका इस्तेमाल सोरायसिस के इलाज में किया जाता है। केईएम अस्पताल के डीन डॉ. हेमंत देशमुख ने बताया कि शनिवार को एक 35 वर्षीय मरीज को 8 घंटे के अंतराल पर इस दवा को दिया गया। Itolizumab को बायोकॉन ने कोविड-19 के इलाज के लिए अधिकृत किया है।

देशमुख ने बताया, 'हमने कुछ हफ्ते पहले केईएम और कोविड-19 का इलाज कर रहे अन्य अस्पतालों में इस दवा के क्लिनिकल ट्रायल की इजाजत मांगी थी।' अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र पहला ऐसा राज्य है जिसने त्वचा रोग में इस्तेमाल होने वाली दवा को कोविड-19 के इलाज के लिए इस्तेमाल किया। अन्य किसी राज्य में इसके ट्रायल की अभी तक कोई खबर नहीं मिल पाई है।

शरीर में घुसीं बाहरी कोशिकाओं से लड़ने में मदद करती है दवा
इस दवा को 'humanised anti-CD6 monoclonal antibody' के तौर पर क्लासिफाई किया गया है। जिसका मतलब होता है लैब में पैदा किया गया ऐसा मॉलिक्यूल जो बाहरी कोशिकाओं से लड़ने में रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए सब्सटीट्यूट एंटीबॉडी का काम करता है। जिस 35 वर्षीय मरीज पर इस दवा का ट्रायल किया गया वह वर्ली का रहने वाला है और पेशे से ड्राइवर है। उसे 27 अप्रैल को केईएम में भर्ती किया गया था, अगले दिन वह कोविड-19 पॉजिटिव पाया गया।

दवा से मजबूत होगा मरीज का इम्यून सिस्टम
केईएम हॉस्पिटल के एक डॉक्टर ने बताया कि मरीज को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है क्योंकि उसका ऑक्सीजन लेवेल 90 तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया, 'इस शख्स को कम गंभीर मरीज की श्रेणी में रखा जा सकता है। हमने उसे दवा दी है जिससे उसका इम्यून सिस्टम मजबूत होगा और वह कोरोना से आसानी से लड़ सकेगा।' इस बीच बीएमसी अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल ऐसे दूसरे कोविड-19 मरीज की तलाश में हैं जिस पर प्लाज्मा ट्रीटमेंट थेरपी का ट्रायल किया जा सके।