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मुस्लिम होने के कारण नहीं मिला इलाज? पढ़ें- भरतपुर के अस्पताल की पूरी कहानी
April 5, 2020 • Rajkumar Gupta

भरतपुर। राजस्थान में भरतपुर शहर के जनाना अस्पताल में मुस्लिम महिला को भर्ती नहीं करने और नवजात की मौत के विवादास्पद मामले में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रसूता और उसकी भाभी के अलग-अलग बयान सामने आए हैं। प्रसूता जहां एक वीडियो में कहा रही हैं कि 'ऐसा तो ना कहा कि तुम मुसलमान हो'। वहीं उसकी भाभी कह रही हैं कि पुलिस बयान के लिए दबाव बना रही है। जबकि इस मसले को उठाने वाले पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ट्विटर पर अपने पहले वाले बयान की पैरवी करते नजर आ रहे हैं। जबकि इस पूरे मामले की तहकीकात में जुटे जांच अधिकारी यूआईटी सचिव एडीएम उम्मेदीलाल मीणा ने बताया है कि जांच में पीड़ित पक्ष से बयान लिए गए हैं और चिकित्सकों से भी जानकारी ली गई जिसमें पाया है कि मुस्लिम होने के नाते उसको रेफर नहीं किया गया था, बल्कि पीड़िता का इलाज किया गया।

अस्पताल प्रशासन के पास प्रसूता के रेफर का कोई रिकॉर्ड नहीं!
सीकरी सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र से शनिवार सुबह 8 बजे रेफर होकर आयी मुस्लिम महिला 33 वर्षीय प्रवीना पत्नी इरफ़ान खान को चिकित्सकों ने यह कहकर रेफर कर दिया कि वह एनेमिक है और कई कॉम्प्लीकेशन है। लेकिन उसके बाद दबाब पड़ने पर अस्पताल के चिकिसकों ने उसी महिला को करीब डेढ़ घंटे बाद भर्ती कर लिया गया। अब चिकित्सक कह रहे हैं कि उसको खून चढ़ा दिया है और अब उसकी तबियत ठीक है। दूसरी तरफ अस्पताल प्रशासन का दावा है की प्रसूता का इलाज किया गया था लेकिन उसको खून की कमी के चलते रेफर किया गया। हालांकि अस्पताल प्रशासन के पास प्रसूता के रेफर का कोई रिकॉर्ड दस्तावेज नहीं है और न ही उनके पास इलाज किए जाने का ही कोई रिकॉर्ड है।

एम्बुलेंस में प्रसव के दौरान नवजात बच्चे की मौत
दरअसल, प्रसूता सुबह 8 बजे जनाना अस्पताल डिलीवरी के लिए पहुंचती है लेकिन चिकित्सक उसको गेट पर ही रेफर स्लिप थमा कर कह देते हैं कि आप लोग जयपुर जाओ। लेकिन जब अस्पताल ने उसको रेफर किया तो उसके लिए एम्बुलेंस उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई? बाद में पीड़िता का पति किराए की एम्बुलेंस लेकर जयपुर के लिए रवाना होता है। इसी बीच महज पांच किलोमीटर की दूरी पर ही एम्बुलेंस में उसकी डिलीवरी हो जाती है। इस दौरान नवजात बच्चे की मौत हो जाती है।

हादसे को लेकर मंत्री के ट्वीट के बाद हंगामा
बच्चे की मौत के बाद महिला का पति इरफ़ान खान उसको लेकर वापस उसी जनाना अस्पताल पहुंचता है। करीब 11:30 बजे के वक्त वहां तैनात चिकित्सक उसको धक्का देकर बाहर निकाल देते हैं। बाद में करीब 12 बजे मीडियाकर्मी जब वहां पहुंचते हैं। करीब 20 मिनट बाद ही केबिनेट मंत्री विश्वेन्द्र सिंह इस हादसे को लेकर ट्वीट करते हैं। इस दबाव में अस्पताल प्रशासन महिला को 1:40 बजे भर्ती करता है। यानी मंत्री के ट्वीट के बाद करीब डेढ़ घंटे बाद उसको भर्ती किया जाता है। जबकि करीब दो घंटे तक महिला तड़पती ही अस्पताल के गेट पर ही पड़ी रहती है।

अस्पताल में भर्ती, इलाज जारी
जनाना अस्पताल में महिला का इलाज कर रहे चिकित्सक डॉ. सुरेश गर्ग के अनुसार महिला को खून की कमी थी मगर खून चढ़ाने के बाद अब महिला की हालत काफी अच्छी है। यानी जिस खून की कमी के चलते उसको रेफर किया गया था मंत्री के दखल के बाद उसी अस्पताल में उसको खून चढ़ा कर इलाज कर दिया गया। सीकरी सामुदायिक स्वास्थय केंद्र की स्लिप पर चिकित्सक ने रेफर किया उस पर लिखा है कि प्रसूता के पेट में 8 माह का बच्चा है और उसकी ब्लीडिंग हो रही है। इसी आधार पर उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर किया जा रहा है। वहीँ जनाना अस्पताल की रेफेर स्लिप पर अस्पताल की मोहर तक नहीं है। और न ही रेफर का अस्पताल में कोई रिकॉर्ड है।


इन सवालों पर टिकी है जांच
अब सवाल उठता है की खून की कमी के चलते उसको रेफर किया तो कुछ घंटे बाद उसी अस्पताल में उसको खून चढ़ाया गया। लेकिन हादसे से पहले ऐसा क्यों नहीं किया गया। जब महिला को रेफर किया तो अस्पताल ने उसके लिए एम्बुलेंस उपलब्ध क्यों नहीं कराई? सीएचसी के मुताबिक, वह आठ माह की गर्भवती थी और ब्लीडिंग हो रही थी तो उसका इलाज पहले यहां क्यों नहीं किया गया? जो इलाज आज अस्पताल में हो रहा है उस इलाज को हादसे से पहले क्यों शुरू नहीं किया गया? चिकित्सकों के मुताविक जब उसको कॉम्प्लीकेशन्स थी तो फिर उसी अस्पताल में अब इलाज संभव कैसे हुआ?