ALL Rajasthan
प्लाज्मा थेरेपी क्या है, क्या हो सकता है कोरोना का इलाज
April 18, 2020 • Rajkumar Gupta


कोरोना वायरस का ठीक इलाज या टीका अबतक नहीं मिला है। इस बीच चर्चा है कि 100 साल से ज्यादा पुराने तरीके प्लाज्मा ट्रीटमेंट से कोरोना का तोड़ निकाला जा सकता है। दिल्ली, पंजाब जैसे राज्य में इसको ट्रायल के तौर पर मंजूरी मिल गई है। प्लाज्मा ट्रीटमेंट क्या है, कैसे इससे इलाज होता है सब यहां जानिए।
 प्लाज्मा थेरेपी क्या है, क्या हो सकता है कोरोना का इलाजप्लाज्मा ट्रीटमेंट या थेरेपी कोरोना वायरसयानी कोविड 19 (covid 19) का इलाज कर पाएगी या नहीं यह देखना होगा। इससे पहले सार्स (2003) और मर्स (2012) में भी प्लाज्मा थेरेपी से इलाज किया गया था। ये भी कोरोना वायरस कटेगिरी में आते हैं।
करीब 130 साल पुराना है तरीका
आपने प्लाज्मा ट्रीटमेंट का नाम भले ही पहली बार सुना हो, लेकिन यह कोई नया इलाज नहीं है। यह 130 साल पहले यानी 1890 में जर्मनी के फिजियोलॉजिस्ट एमिल वॉन बेह्रिंग ने खोजा था। इसके लिए उन्हें नोबेल सम्मान भी मिला था। यह मेडिसिन के क्षेत्र में पहला नोबेल था।
​राज्य सरकारों ने मांगी है इजाजत
देश के कई राज्यों ने प्लाज्मा तकनीक को आजमाने के लिए केंद्र सरकार से इजाजत मांगी है। कुछ को इजाजत मिल भी गई है। ये फिलहाल ट्रायल के तौर पर इस तकनीक का इस्तेमाल करनेवनाले हैं। इसमें दिल्ली, केरल, पंजाब, महाराष्ट्र और तमिलनाडु शामिल हैं। दिल्ली में वेंटिलेटर पर रखे गए शख्स को यह इलाज देना शुरू किया गया है। फिलहाल उसके नतीजों का इंतजार है।
क्या है प्लाज्मा तकनीक
हमारा खून चार चीजों से बना होता है। रेड ब्लड सेल, वाइट ब्लड सेल, प्लेट्लेट्स और प्लाज्मा। इसमें प्लाज्मा खून का तरल हिस्सा है। इसकी मदद से ही जरूरत पड़ने पर एंटीबॉडी बनती हैं। कोरोना अटैक के बाद शरीर वायरस से लड़ना शुरू करता है। यह लड़ाई एंटीबॉडी लड़ती है जो प्लाज्मा की मदद से ही बनती हैं। अगर शरीर पर्याप्त एंटी बॉडी बना लेता है तो कोरोना हार जाएगा। मरीज के ठीक होने के बाद भी एंटीबॉडी प्लाज्मा के साथ शरीर में रहती हैं, जिन्हें डोनेट किया जा सकता है।
कैसे होता है इलाज
जिस मरीज को एक बार कोरोना का संक्रमण हो जाता है, वह जब ठीक होता है तो उसके शरीर में एंटीबॉडी डिवेलप होती है। यह एंटीबॉडी उसको ठीक होने में मदद करते हैं। ऐसा व्यक्ति रक्तदान करता है। उसके खून में से प्लाज्मा निकाला जाता है और प्लाज्मा में मौजूद एंटीबॉडी जब किसी दूसरे मरीज में डाला जाता है तो बीमार मरीज में यह एंटीबॉडी पहुंच जाता है, जो उसे ठीक होने में मदद करता है। एक शख्स से निकाले गए प्लाजमा की मदद से दो लोगों का इलाज संभव बताया जाता है। कोरोना नेगेटिव आने के दो हफ्ते बाद वह प्लाज्मा डोनेट कर सकता है।
​कितना कारगर से प्लाज्मा ट्रीटमेंट
प्लाज्मा ट्रीटमेंट कितना कारगर है साफ तौर पर कहा नहीं जा सकता। लेकिन चीन में कुछ मरीजों को इससे फायदा हुआ था। तीन भारतीय-अमेरीकी मरीजों को भी इससे फायदे की खबरें थी। फिलहाल भारत में ICMR और DGCI ट्रायल के बाद ही कुछ कहेंगी।