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प्रवासी मजदूरों को अपराधी मानती है बिहार पुलिस! पत्र लीक होने पर तेजस्वी हुए उग्र, बोले- 'माफी मांगें CM नीतीश'
June 5, 2020 • Rajkumar Gupta

पटना
कोरोना संकट से निपटने के लिए लॉकडाउन के दौरान लाखों प्रवासी मजदूर कल-कारखाने बंद होने के कारण घर वापसी कर चुके हैं। नीतीश सरकार भी लगातार यही कहती रही है कि प्रवासी मजदूरों को अब वापस दूसरे राज्य जाने की जरूरत नहीं है। बिहार सरकार ने कोरोना संक्रमण की चुनौती को अवसर में बदलने का निर्णय लिया है। इसलिए घर वापसी करने वाले सभी मजदूरों को उनके स्किल के अनुसार ही रोजगार देने का काम बिहार सरकार करेगी।
नीतीश के उलट उनकी पुलिस का मानना है सभी को रोजगार की संभावना कम
इसको लेकर बिहार पुलिस मुख्यालय की तरफ से जो पत्र जारी किया गया है। उसमें लिखा है कि पिछले दो महीने में बिहार के बाहर काम करने वाले मजदूरों की भारी संख्या में बिहार आगमन हुआ है। सरकार के सभी प्रयासों के बावजूद सूबे में सभी को रोजगार मिलने की संभावना कम है। आज की तारीख में घर वापसी करने वाले प्रवासी मजदूर गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के कारण परेशान और तनाव में हैं।

मजदूरों के इसी तनाव से उत्पन्न हो सकती है विधि-व्यवस्था की गंभीर समस्या
पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि घर वापसी करने वाले प्रवासी मजदूरों के आर्थिक स्थिति की वजह से बिहार में आपराधिक घटनाओं में भी वृद्धि हो सकती है। बेरोजगारी से परेशान होकर प्रवासी मजदूर अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए आपराधिक गतिविधियों में भी शामिल हो सकते हैं। जिससे अपराध में वृद्धि होने के साथ विधि व्यवस्था पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

29 मई को एडीजी हेक्वाटर अमित कुमार द्वारा जारी पत्र में यह भी कहा गया है कि इस मामले में सतर्कता बरतने की जरूरत है। इसलिए सभी जिला पधाधिकारियों और वरीय पुलिस अधीक्षक और रेल एसपी की ओर से स्थानीय स्थिति को देखते हुए कार्य योजना तैयार कर ली जाए ताकि आवश्यकतानुसार कार्रवाई की जा सके।

29 मई को जारी यह पत्र आज मीडिया के हाथ लगी। मिली जानकारी के अनुसार मीडिया में खबर आने के बाद जब नीतीश सरकार की किरकिरी शुरू हुई तो बताया जा रहा है कि इस पत्र को रद्द कर दिया गया है। पुलिस मुख्यालय की ओर से भी कहा गया कि भूलवश यह पत्र जारी कर दिया गया था, जिसे अब वापस ले लिया गया है।

तेजस्वी ने कहा नीतीश-सुशील बिहार की जनता से मांगें माफी
बिहार के ADG विधि व्यवस्था के पत्र पर भड़के तेजस्वी यादव ने कहा कि क्या सरकार श्रमवीरों भाईयों को चोर, लुटेरा और अपराधी समझ रही है? क्यों सरकार इन्हें आरम्भ से ही अपराधियों के समान समझ पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर पशुवत व्यवहार करती रही? सरकार का यह पत्र Dignitiy of Labour (श्रम की गरिमा) और Dignity of Human (मानव की गरिमा) की धज्जियां उड़ा रहा है। सरकार द्वारा अपने ही प्रदेशवासियों को दोयम दर्जे का नागरिक ही नहीं, बल्कि उन्हें लुटेरा और अपराधी समझा जा रहा है।

सरकार मजदूरों को अपराधी बोल रही है: तेजस्वी
नेता प्रतिपक्ष ने नीतीश कुमार पर बरसते हुए कहा कि प्रवासी शब्द पर प्रवचन देने वाले मुख्यमंत्री जी, आपकी सरकार श्रमिकों को प्रवासी ही नहीं बल्कि अपराधी भी बोल रही है। आपके ADG के पत्र के अनुसार रोजगार नहीं मिलने पर हमारे मजदूर भाई उग्र होने वाले हैं! तो क्या सरकार यह मान चुकी है कि उनके लिए हमारे श्रमवीरों को रोजगार देना असम्भव है? फिर सरकार रोज नए दावे कर श्रमवीर भाईयों को भ्रमित क्यों कर रही है? क्या ये हवाई घोषणाएं बस चुनाव तक के लिए बिहारवासियों को मूर्ख बनाने की कवायद तो नहीं? 
शर्मनाक आदेश वापस ले सरकार, मजदूर अपराधी नहीं: कांग्रेस
कांग्रेस विधान पार्षद प्रेमचंद्र मिश्रा ने पुलिस मुख्यालय के पत्र को शर्मनाक और मजदूर विरोधी मानसिकता का परिचायक बताया है। उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूरों के बिहार लौटने के बाद कभी संक्रमण फैलाने का आरोप तो कभी क्वारंटीन सेंटर पर हंगामा करने का आरोप लगता रहा। अब पुलिस अपर महानिदेशक अमित कुमार के पत्र ने मजदूरों के प्रति सरकार की असली सोच को सामने ला दिया है। 
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए तथा मुख्यालय की ओर से जारी सर्कुलर को तत्काल वापस लेते हुए लाखों प्रवासी श्रमिकों से मांफी मांगनी चाहिए। क्योंकि वे मेहनत मजदूरी से काम कर अपना परिवार चलाने वाले लोग हैं लोग कोई अपराधी या आतंकी समूह के सदस्य नहीं।