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रैपिड एंटी बॉडी टेस्ट से भारत कैसे जीतेगा कोरोना वायरस से जंग, जानिए
April 8, 2020 • Rajkumar Gupta

नई दिल्ली
कोरोना वायरस टेस्टिंग में फिलहाल भारत भले थोड़ा पीछे हो लेकिन अब सरकार ने इसका तोड़ ढूंढ लिया है। एंटी बॉडी टेस्ट से भारत अब कोरोना वायरस को मत देने की तैयारी में जुट गया है। रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट अबतक किए जा रहे टेस्ट के मुकाबले तेज हैं और नतीजे 30 मिनट में बता देता है। इसके साथ ही यह किफायती भी है। भारत में कोरोना टेस्ट की बात करें तो भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के मुताबिक 6 अप्रैल तक कुल 1 लाख 11 हजार टेस्ट हुए हैं। इसमें 5 हजार से ज्यादा कोरोना पॉजेटिव पाए गए हैं।

हॉट-स्पॉट पर होगा टेस्टिंग का जोर
कोरोना को रोकने के लिए अब रैपिड टेस्ट होंगे। ये फटाफट टेस्ट सबसे पहले कलस्टर और हॉटस्पॉट बन चुकी जगहों पर होंगे। मतलब जहां कोरोना ज्यादा फैल रहा है। सरकार मेडिकल स्टाफ को करीब 7 लाख रैपिड टेस्ट किट देगी। देशभर के हॉटस्पॉट जिसमें अब दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश शामिल है उनमें टेस्ट ज्यादा होंगे। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी कहा था कि राज्य सरकार टेस्टिंग पर जोर देगी। वे दिल्ली के दो हॉटस्पॉट दिलशाद गार्डन और निजामुद्दीन हॉटस्पॉट पर टेस्ट ज्यादा करवाएंगे। बता दें कि कोरोना से जंग में यह सबसे जरूरी है कि प्रति 10 लाख की आबादी पर कितनों के टेस्ट हुए।

पीसीआर और रैपिड टेस्ट में अंतर
फिलहाल सरकार पीसीआर (पोलीमरेज चेन रिएक्शन) टेस्ट कर रही है। इसमें नाक या गले के नमूने लिए जाते हैं और नतीजे आने में 5 घंटे का वक्त लगता है। जबकि ऐंटी बॉडी टेस्ट में 30 मिनट में नतीजे आते हैं। इसमें ब्लड सैंपल से टेस्ट होता है। उंगली से खून का सैंपल लिया जाता है।

रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट क्या है
एंटी बॉडी टेस्ट आखिर क्या है इसकी जानकारी आईसीआमआर के हेड साइंटिस्ट डॉ आर गंगाखेडकर ने दी। रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट से ये कनफर्म नहीं होता कि किसी शख्स में कोरोना वायरस है या नहीं। बस ये पता चलता है कि उसमें कोरोना वायरस से लड़ने वाली एंटीबॉडी बन रही हैं या नहीं। यानी ये कोरोना मरीजों की संभावित पहचान करने में मददगार है। गंगाखेडकर ने बताया कि इस टेस्ट से पता चलता है कि क्या शरीर में कोरोना वायरस आया था या नहीं। ऐंटीबॉडी पॉजेटिव आती है तो पीसीआर करवाने की सलाह दी जाती है। अगर वह भी पॉजेटिव आई तो यानी कोरोना है। अगर नहीं तो यानी पुराना इंफेक्शन हो सकता है। ऐसे में अलग रहने की सलाह दी जाती है। अगर दोबारा रिपोर्ट नेगेटिव आई तो शख्स घर जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि यह टेस्ट फटाफट हो जाता है।

रियल टाइम पीसीआर से
रियल टाइम पीसीआर के मुकाबले रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट बेहतर है। एक तो ये सिर्फ 3000 रुपए में हो सकता है, जबकि रियल टाइम पीसीआर में करीब 4500 रुपए खर्च होते हैं। यानी ये सस्ता है। वहीं दूसरी ओर इसमें समय भी कम लगता है। महज 15-30 मिनट में ही इसका नतीजा आ जाता है, जबकि रियल टाइम पीसीआर का नतीजा आने में 2-3 दिन लग जाते हैं और इस समय के दौरान इंफेक्शन काफी लोगों में फैल सकता है।

साउथ कोरिया ने पेश किया उदाहरण
कोरोना से लड़ रही दुनिया मान चुकी है कि इसे हराने के दो ही तरीके हैं। पहला एक दूसरे से दूर रहना और दूसरा बड़े पैमाने पर टेस्ट। टेस्टिंग के मामले में साउथ कोरिया ने दुनिया के सामने उदाहरण पेश किया था। वहां करीब 20 हजार लोगों की रोज टेस्टिंग हुई थी। देश में कुल व्यक्ति के हिसाब से पूरी दुनिया में इतने बड़े पैमाने पर टेस्टिंग कहीं नहीं हुई।