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रेलवे की बेदर्द अपील- श्रमिक ट्रेनों में गर्भवती महिलाएं, बच्चे सफर न करें; सवाल- क्या इन ट्रेनों में लोग सैर पर निकले हैं? बच्चों और महिलाओं को छोड़कर मजदूर घर कैसे लौटेंगे?
May 29, 2020 • Rajkumar Gupta


तस्वीर 24 मई की है। नजारा अहमदाबाद का है। यहां कई मजदूर अपने परिवार के साथ इस इंतजार में खड़े थे कि किसी तरह पहले वे रेलवे स्टेशन तक पहुंच जाएं ताकि वहां से ट्रेनों में उनकी घर वापसी हो सके। इनके साथ बच्चे भी थे, जिन्हें वे अकेला नहीं छोड़ सकते थे। तस्वीर 24 मई की है। नजारा अहमदाबाद का है। यहां कई मजदूर अपने परिवार के साथ इस इंतजार में खड़े थे कि किसी तरह पहले वे रेलवे स्टेशन तक पहुंच जाएं ताकि वहां से ट्रेनों में उनकी घर वापसी हो सके। इनके साथ बच्चे भी थे, जिन्हें वे अकेला नहीं छोड़ सकते थे।

नई दिल्ली. रेलवे ने शुक्रवार को एक अजीब अपील की। कहा- ‘पहले से बीमार लोग, गर्भवती महिलाएं, 10 साल से कम उम्र के बच्चे और बुजुर्ग श्रमिक ट्रेनों में यात्रा करने से बचें।’ थोड़ी देर बाद रेल मंत्री पीयूष गोयल भी सामने आए। 

रेल मंत्री ने भी ट्वीट करके यही बात दोहराई। बस अपने अफसरों की बातों को थोड़ा सुधार दिया। बोले- ‘आवश्यक होने पर ही यात्रा करें।’ पर सबसे जरूरी बात ये है कि इन श्रमिक स्पेशल ट्रेनाें में सफर कौन कर रहा है? सीधा-सा जवाब है- सबसे मजबूर लोग। तो क्या ये लोग परिवार को छोड़कर निकल पड़ें? 

रेलवे और मंत्रीजी की अपील तब सामने आई है, जब घर लौटते मजदूरों और उनके बच्चों की मौत का सिलसिला बदस्तूर जारी है। 48 घंटे में श्रमिक ट्रेनों में 9 लोगों की मौत हुई है। जो मजदूर लॉकडाउन की वजह से 2 महीनों से दूसरे राज्यों में फंसे हैं, वे अपने घर के बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पीछे अकेला छोड़कर सफर कैसे कर सकते हैं? 

इन लोगाें के लिए श्रमिक ट्रेनें एक मई से शुरू हुई हैं। गुरुवार को प्रवासियों के मुद्दे पर जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, तब सरकार ने दावा किया कि 27 दिन के अंदर हमने 91 लाख लोगों को घर पहुंचाया है। लेकिन मुंबई, दिल्ली के रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों से रोज सामने आ रहीं तस्वीरें बताती हैं कि अभी भी बड़ी तादाद में मजदूरों को घर वापसी का इंतजार है।

रेलवे ने कबूला- कुछ मौतें हुई हैं
रेलवे ने अपने बयान में कहा- यह देखने में आया है कि ट्रेनों में कुछ ऐसे लोग भी सफर कर रहे हैं, जो पहले से किसी न किसी वजह से बीमार हैं। इस वजह से उनके सामने कोरोना का खतरा ज्यादा है। पहले से बीमार हालत में सफर कर रहे लोगों की मौत होने के कुछ मामले देखे गए हैं।

रेलवे ने अपने बयान में आगे कहा, ‘हाइपरटेंशन, डायबिटीज, दिल की बीमारी, कैंसर, कमजोर इम्यून सिस्टम जैसी सेहत से जुड़ी पहले से चल रही दिक्कतों का सामना कर रहे लोगों, गर्भवती महिलाओं, 10 साल से कम उम्र के बच्चों और 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों से रेल मंत्रालय अपील करता है कि बहुत जरूरी न हो तो वे रेल यात्रा करने से बचें।’

1. डेढ़ साल के रहमत से पूछिए, उसके लिए बीमार मां के साथ ट्रेन का सफर क्यों जरूरी था?
बमुश्किल दो दिन बीते हैं। डेढ़ साल के बच्चे रहमत के एक वीडियो ने देश को झकझोर दिया था। रहमत मुजफ्फरपुर स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर मां के कफन को आंचल समझकर खेल रहा था। जबकि उसकी मां अरवीना खातून की मौत हो चुकी थी। रहमत समझ नहीं सका कि आखिर मां काे क्या हुअा?

सरकार कहती है कि अरवीना पहले से बीमार थी। दिमागी हालत भी खराब थी। अब सवाल यह उठता है कि डेढ़ साल के रहमत को ट्रेन में सफर क्यों करना पड़ा? जवाब है- रहमत का पिता उसे और उसकी मां को पहले ही छोड़ चुका है। मजबूरी में दोनों मां-बेटे अरवीना की बहन और जीजा के पास रहते थे।

23 मई काे वे सभी अहमदाबाद से मधुबनी लौट रहे थे। लौटना उनकी मजबूरी थी। इसलिए डेढ़ साल के रहमत और पहले से बीमार उसकी मां को ट्रेन में सफर करना पड़ा।

तस्वीर बिहार के मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन की है। डेढ़ साल का यह बच्चा अपनी उस मां को चादर खींचकर उठाने की कोशिश कर रहा है, जो अब इस दुनिया में है ही नहीं। गुजरात से आते वक्त उनकी मौत हो चुकी है। 

2. दो महीने से घर लौटने की कोशिश कर रहे इस मजदूर से पूछिए, क्या बच्चे को पीछे छोड़ घर लौट जाते?
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर खड़े मजदूर मोहन बेहद खुश और उत्साहित होकर घर वालों से फोन पर बात कर रहे थे- टिकट का इंतजाम हो गया है...हम ट्रेन में चढ़ने ही वाले हैं और जल्द ही घर पहुंच जाएंगे। फोन बंद किया, तो पास खड़े 5 साल का बेटे ने पूछा- क्या हम दिवाली मनाने जा रहे हैं? 

सवाल सुनते ही मोहन की आंखें भर आईं और बेटे को गोद में ले लिया। वे गुड़गांव के पास सोहना में काम करते थे। लॉकडाउन के बाद यहां-वहां से मदद मिलती रही, लेकिन जब जिंदगी मुश्किल हो गई, तो बिहार लौटे। वे कहते हैं कि दो महीने से कोशिश कर रहा था। लंबे इंतजार के बाद आखिर ट्रेन में चढ़ने का मौका आया। मेरे पास इतना बड़ा दिल नहीं है कि बेटे को बता सकूं कि हम इस साल कोई त्योहार नहीं मना पाएंगे।

3. अब उस इरशाद की कहानी जानिए, जिसने ट्रेन में चढ़ने के दौरान दम तोड़ दिया
25 मई को मुजफ्फरपुर में बेतिया की ट्रेन में चढ़ने के दौरान 4 साल के इरशाद की मौत हो गई। इरशाद अपने पिता पिंटू के साथ दिल्ली से पटना जाने वाली ट्रेन में सवार हुआ था। पिंटू ने बताया कि उमस भरी गर्मी और भूख की वजह से उसने बेटे को खो दिया। पिंटू दिल्ली में किसी पेंट कंपनी में काम करता था। लॉकडाउन के कारण वहां फंस गया। मजबूरी में वे सारा सामान बेचकर घर लौट रहे थे। ऐसे में बच्चे को पीछे कैसे छोड़ देते? 

सांसें टूट गईं, लेकिन घर की आस में खुली रहीं आंखें। यह तस्वीर इरशाद की है, वह अपने पिता के साथ दिल्ली से आ रहा था। मुजफ्फरपुर में बतिया की ट्रेन में चढ़ने के दौरान उसने गर्मी से दम तोड़ दिया।