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रोटी, कपड़ा और मकान की नई चुनौती, पलायन नहीं रुका तो 30 जून तक 80 फीसदी मजदूर अपने घरों में होंगे
May 24, 2020 • Rajkumar Gupta

नई दिल्ली
कोरोना लॉकडाउन की सबसे ज्यादा मार प्रवासी मजदूरों पर ही पड़ी है। काम धंधा बंद होने से उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है और इसलिए वे बड़ी संख्या में घरों की तरफ कूच कर रहे हैं। राज्य सरकारों की लाख कोशिशों के बावजूद उनका पलायन रुक नहीं रहा है। मजदूर न केवल बस और ट्रेन से अपने गृह राज्य पहुंच रहे हैं बल्कि बड़ी संख्या में लोग पैदल, साइकल से या फिर ट्रक से भी रवाना हुए हैं।
केंद्र का कहना है कि देशभर में करीब चार करोड़ प्रवासी श्रमिक विभिन्न कार्यों में लगे हुए हैं और राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लागू होने के बाद से अब तक उनमें से 75 लाख लोग ट्रेनों और बसों से अपने घर लौट चुके हैं। इसमें ट्रक, साइकिल या पैदल अपने घर पहुंचने वालों की संख्या शामिल नहीं है। इस हिसाब से देखें तो करीब 20 फीसदी प्रवासी घर पहुंच चुके हैं। अगर पलायन का यह सिलसिला यूं ही जारी रहा तो 30 जून तक 80 फीसदी प्रवासी कामगार अपने घरों में होंगे जिससे रोटी, कपड़ा और मकान की नई चुनौती खड़ी हो जाएगी।

आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं
देश में प्रवासी मजदूरों के बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। लेकिन 2011 की जनगणना के मुताबिक देश में प्रवासियों की संख्या 45.36 करोड़ है जो देश की कुल आबादी का 37 फीसदी है। इनमें एक राज्य से दूसरे राज्य तथा राज्य के भीतर पलायन करने वाले लोग शामिल हैं।

रिसर्च एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज के प्रोफेसर अमिताभ कुंडू के मुताबिक देश में अंतरराज्यीय प्रवासियों (inter-state migrants) की संख्या 6.5 करोड़ है। इनमें से 33 फीसदी मजदूर हैं। इनमें से भी 30 फीसदी कैजुअल वर्कर हैं और 30 फीसदी असंगठित क्षेत्र में नियमित काम करते हैं। प्रोफेसर कुंडू ने 2011 की जनगणना, एनएसएसओ के सर्वेक्षणों और इकनॉमिक सर्वे के आधार पर देश में प्रवासियों की संख्या का अनुमान लगाया है।

सबसे ज्यादा यूपी-बिहार के प्रवासी
अगर इनमें रेहड़ी पटरी वालों को जोड़ दिया जाए तो अपने गृह राज्य से बाहर रहने वालों की संख्या करीब 1.2 से 1.8 करोड़ बढ़ जाएगी। लॉकडाउन के कारण रेहड़ी पटरी वालों के सामने भी आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

प्रोफेसर कुंडू के अनुमानों के मुताबिक देश में कुल अंतरराज्यीय प्रवासियों में उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों की संख्या क्रमशः 25 और 14 फीसदी है। इसके बाद राजस्थान (6) और मध्य प्रदेश (5) का स्थान है। इसका मतलब है कि उत्तर प्रदेश के करीब 40 से 60 लाख लोग घर लौटना चाहते हैं। इसी तरह बिहार के 18 से 28 लाख लोग घर वापसी को बेकरार हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो राजस्थान के 7 से 10 लाख और मध्य प्रदेश के 6-7 लाख लोग अपने घर लौटना चाहते हैं।

उत्तर प्रदेश के 21 लाख प्रवासी घर लौटे
उत्तर प्रदेश में देश के अन्य हिस्सों से प्रवासी श्रमिकों और कामगारों को लेकर अब तक 1018 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें आ चुकी हैं और इनसे 13 लाख 54 हजार से अधिक प्रवासी कामगार घर लौटे हैं। अपर मुख्य सचिव व गृह एवं सूचना - अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि ट्रेनों, बसों और अन्य साधनों से अब तक प्रदेश में 21 लाख लोग आ चुके हैं। इस हिसाब से देखें तो उत्तर प्रदेश के करीब आधे प्रवासी घर पहुंच चुके हैं।

केंद्र का कहना है कि देश भर में करीब चार करोड़ प्रवासी श्रमिक विभिन्न कार्यों में लगे हुए हैं और राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लागू होने के बाद से अब तक उनमें से 75 लाख लोग ट्रेनों और बसों से अपने घर लौट चुके हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा रेलवे ने देश के विभिन्न हिस्सों से प्रवासी श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए एक मई से 2,600 से अधिक श्रमिक विशेष ट्रेनें चलाई हैं।

देश में कुल चार करोड़ प्रवासी श्रमिक
उन्होंने कहा कि पिछली जनगणना की रिपोर्ट के मुताबिक देश में चार करोड़ प्रवासी श्रमिक हैं। श्रमिक विशेष ट्रेनों से 35 लाख प्रवासी श्रमिक अपने गंतव्य तक पहुंच गए हैं, जबकि 40 लाख प्रवासियों ने अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए बसों से यात्रा की।

मजदूर न केवल बस और ट्रेन से अपने गृह राज्य पहुंचे हैं बल्कि बड़ी संख्या में लोग पैदल, साइकल से या फिर ट्रक से भी रवाना हुए हैं। इसलिए ये आंकड़े यह नहीं बताते कि अब कितने प्रवासी अपने कार्यस्थल पर बचे हैं। लॉकडाउन से ढील के बावजूद श्रमिकों की कमी की वजह से भी आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।