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सबको कोरोना जांच की जरूरत नहीं, जरूरी है इलाज को समझना
April 23, 2020 • Rajkumar Gupta


एक्सपर्ट का कहना है कि लोग कोरोना के खौफ में बेवजह टेस्ट भी करा रहे हैं। कई बार जानकारी न होने की वजह से और कई बार जबरन ऐसा किया जा रहा है। वहीं, प्राइवेट हॉस्पिटल भी बिना लक्षण के लोगों का टेस्ट कर रहे हैं।

    विदेश का दौरा करके लौटे सभी लोगों की जांच बेहद जरूरी है
    लैब टेस्ट में जितने लोग पॉजिटिव आए हैं, उनके संपर्क में आने वालों की जांच
    हेल्थकेयर वर्कर जो कोविड मरीज के इलाज में लगे हैं उनकी भी जांच होगी
    आईसीएमआर के मुताबिक प्रेग्नेंट महिलाओं की जांच जरूरी है

नई दिल्लीः कोरोना संक्रमण की जांच और इलाज को लेकर लोगों में संशय बना हुआ है। इस बारे में दिल्ली सरकार के सलाहकार डॉक्टर एसके सरीन ने कहा है कि लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। मरीज पहले से परेशान हैं, उनकी परेशानी समझें। उन्हें सही गाइड करें। जो लोग अस्पतालों में काम कर रहे हैं, उन्हें भी यह समझने की जरूरत है। डॉक्टर सरीन ने सरीन ने कहा कि अभी दो चीजों हो रही हैं। पहला- हर कोई चाहता है कि उसकी जांच हो। यह संभव नहीं है और इसकी जरूरत भी नहीं है। आईसीएमआर के गाइडलाइंस के अनुसार, यह भी जरूरी नहीं कि अगर कोई पॉजिटिव आया तो सभी रिश्तेदारों की जांच की जाए। टेस्ट उसी का होना चाहिए, जिसमें लक्षण हैं, इसलिए टेस्ट के लिए प्रेशर बनाना सही नहीं है। डॉक्टर सरीन ने कहा कि अभी ऐसा भी सुनने में आ रहा है कि कुछ प्राइवेट अस्पताल नॉन कोविड मरीजों की भी जांच करा रहे हैं, यह भी सही नहीं है। हर मरीज की जांच क्यों? बिना वजह मरीज का खर्च बढ़ रहा है, इसे कंट्रोल करने की जरूत है। उन्होंने कहा कि हर अस्पताल को डिटेल स्क्रीनिंग करनी चाहिए। कोई भी मरीज आए, उसका डिटेल फॉर्म भरा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी को भी टेस्ट के पीछे भागना नहीं चाहिए।

टेस्ट के लिए क्या हैं ICMR की गाइडलाइंस
- पिछले 14 दिन में अगर किसी ने विदेश का दौरा किया है, ऐसे सभी लोगों की जांच होगी।
- लैब टेस्ट में जितने लोग पॉजिटिव आए हैं, उनके संपर्क में जिन-जिन लोगों में लक्षण आएगा उन सभी की जांच होगी।
- हेल्थकेयर वर्कर, जो सीधे कोविड मरीज के इलाज में लगे हैं, उनमें लक्षण आने पर सभी की जांच होगी।
- सभी ऐसे मरीज जो सीवियर एक्यूट रेसप्रेट्री इलनेस (SARI) से पीड़ित हैं, उन सभी की जांच होगी।
- ऐसे लोग जो पॉजिटिव मरीज के हाई रिस्क कॉन्टैक्ट में रहे हैं, लेकिन उनमें लक्षण नहीं है, तो ऐसे लोगों की जांच पांचवें दिन और 14वें दिन होगी ।
- इसी तर्ज पर अगर कहीं पर हॉटस्पॉट बना है तो वहां भी इसी तर्ज पर जांच होगी।
- जिन लोगों में लक्षण है और जांच 7 दिन के अंदर हो रही है, तो उनकी जांच आरटीपीसीआर किट्स से होगी। सात दिन बाद एंटीबॉडी किट्स से होगी, लेकिन अगर यह निगेटिव आता है तो फिर उनकी जांच आरटीपीसीआर किट्स से होगी।
- आईसीएमआर ने अब प्रेग्नेंट महिलाओं की जांच जरूरी बताई है। अगर कोई कन्टेनमेंट एरिया में कोई प्रेग्नेंट महिला है और अगले 5 दिनों में उनकी डिलिवरी हो सकती है, तो उनमें कोविड के लक्षण नहीं भी होने पर भी जांच जरूर कराई जाए।

कोविड की जांच किट्स को भी समझिए
आरटी-पीपसीआर किट्स: आरटी-पीपसीआर को एंटीजन टेस्ट भी कहा जाता है। यह टेस्ट नैजल स्वैब से सैंपल लेकर किया जाता है। यह कन्फर्म तरीका है वायरस की पहचान के लिए। लेकिन यह महंगा टेस्ट है। इसमें समय लगता है और इसकी जांच के लिए मशीन की जरूरत होती है। यह किट बाहर से मंगाई जा रही है, इसलिए सरकार इस किट का इस्तेमाल सोच समझ कर कर रही है। यूं तो यह जांच, संक्रमित होने के बाद एक से 14 दिन के बीच कभी भी कराने पर सही आंकलन करती है, लेकिन अमूमन इसका इस्तेमाल लक्षण आने के 7 दिन पहले किया जाता है।

एंटीबॉडी टेस्ट: यह टेस्ट तभी होता है, जब किसी में लक्षण आए कम से कम 7 से 10 दिन हो जाएं। 7 दिन से पहले के लिए आरटीपीसीआर और उसके बाद वाले के लिए एंटीबॉडी। लेकिन अगर जिन मरीजों में लक्षण हैं और जांच में निगेटिव आता है तो फिर ऐसे मरीजों के लिए एंटीपीसीआर जांच करनी होती है।

किनकी हो जांच और कैसे
डॉक्टर एस के सरीन ने बताया कि जहां पर लॉन्ग स्टैंडिंग कॉन्टैक्ट संक्रमण है, मतलब अगर किसी परिवार में कोई पॉजिटिव है, तो उस परिवार के अन्य लोगों में संक्रमण का खतरा ज्यादा है। इसलिए इसमें नेजल स्वैब से ही जांच होनी चाहिए, ताकि सही जानकारी हासिल की जा सके। इसी तरह जो डॉक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ किसी पॉजिटिव मरीज के इलाज में लगे हुए हैं। अगर उनमें कोई डर है तो उनकी भी जांच नेजल स्वैब से ही होनी चाहिए।

पुल टेस्टिंग: ऐसे हॉटस्पॉट, जहां सैकड़ों जांच करनी हैं, लेकिन संक्रमण की संभावना बिल्कुम कम हो, ऐसी जगह पुल टेस्टिंग का तरीका अपना सकते हैं। इसमें एकसाथ 5 या 10 लोगों का सैंपल नैजल स्वैब से लेकर एक ही बार में जांच कर सकते हैं। अगर निगेटिव आया तो आगे किसी की जांच नहीं करनी होगी। लेकिन अगर पॉजिटिव आया तो फिर सबकी अलग-अलग जांच करनी होगी।

अस्पताल में कौन भर्ती हो
दिल्ली में अभी सभी पॉजिटिव मरीजों का एडमिशन किया जा रहा है, लेकिन सरकार ने दो क्राइटेरिया बनाए हैं। एक वो, जिनमें पॉजिटिव होने के बाद लक्षण हों और वो बीमार हैं। दूसरे, ऐसे लोग जिनमें पॉजिटिव होने के बाद भी लक्षण नहीं आए, यानी वो एसिमटोमेटिक हैं, ऐसे लोग भी भर्ती किए जा रहे हैं।

क्वारंटीन किसे किया जा रहा
जो लोग पॉजिटिव मरीज के बहुत क्लोज रहे हैं और उनमें बहुत ज्यादा लक्षण भी दिख रहे हैं, तो ऐसे लोगों को क्वारंटीन किया जाता है। उसके बाद टेस्ट होता है और रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो उन्हें भी एडमिट किया जाता है। लेकिन जिन लोगों में लक्षण नहीं दिखते, उन्हें होम क्वारंटीन किया जा रहा है।

एंटीबॉडी टेस्ट पर लगी रोक
राजस्थान में एंटीबॉडी टेस्ट पर उठाए गए सवाल के बाद आईसीएमआर ने इस किट्स के इस्तेमाल पर दो दिन के लिए रोक लगा दी है। आईसीएमआर किट का रिव्यू करेगा। डॉक्टर के मुताबिक, यह किट प्रेग्नेंसी किट की तरह ही होती है। इसमें दो लाइन होती हैं। एक कंट्रोल लाइन और दूसरा पॉजिटिव और निगेटिव लाइन है। अगर दूसरी लाइन रंग बदलती है, तो मरीज पॉजिटिव है, अगर दूसरी लाइन नहीं आती है तो मरीज निगेटिव है। लेकिन दोनों ही लाइन नहीं आए, तो किट खराब है। इस मामले में क्या हुआ है, इसकी जांच की जा रही है।