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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सरकारी हो या प्राइवेट लैब, मुफ्त में होगी कोरोना वायरस की जांच
April 8, 2020 • Rajkumar Gupta

नई दिल्ली
देश में कोरोना वायरस महामारी के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि मान्यताप्राप्त सरकारी या प्राइवेट लैब में कोरोना वायरस की जांच मुफ्त में होगी। इसके लिए अदालत ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह मान्यताप्राप्त सभी लैबों को मुफ्त में कोरोना जांच करने का निर्देश दे। कोरोना वायरस की जांच से जुड़ी एक याचिका पर अंतरिम आदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 2 हफ्ते में हलफनामा दायर करने को कहा है।

NABL, WHO या ICMR से अप्रूव्ड लैब ही करें जांच: SC
सुप्रीम कोर्ट ने साथ में यह भी कहा कि कोरोना वायरस की जांच सिर्फ वहीं लैब करें तो NABL यानी National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories से मान्यता प्राप्त लैबों या विश्व स्वास्थ्य संगठन या ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) से मंजूरी प्राप्त किसी एजेंसी के जरिए होनी चाहिए।

याचिका में कोरोना वायरस की जांच को मुफ्त में करनी की हुई थी मांग
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में निजी संस्थाओं द्वारा कोरोना परीक्षण के लिए अधिकतम 4,500 रुपये तय करने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की सलाह को चुनौती दी गई थी। याचिका में यह भी निर्देश देने की मांग की गई थी कि ऐसे सभी परीक्षण मान्यता प्राप्त पैथोलॉजिकल लैबों द्वारा किए जाएं। मुफ्त में टेस्ट का सुझाव देते हुए, याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि प्राइवेट लैबों के टेस्टिंग फीस पर पर्दा डालना संविधान के आदर्शों और मूल्यों का उल्लंघन करता है।

लोगों से टेस्ट के पैसे नहीं लिए जा सकते: SC
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब लोगों को कोरोना टेस्ट के लिए पैसे नहीं लगेंगे। अभी तक सरकार ने 4500 रुपये रेट तय कर रखा है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. रवींद्र भट्ट की बेंच ने कहा कि लोगों से इस टेस्ट के लिए पैसे नहीं लिए जा सकते। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्राइवेट लैब द्वारा लिए गए टेस्ट से संबंधित पैसे कैसे वापस होंगे, इस मसले पर बाद में विचार होगा।

कोर्ट ने कहा कि दुनिया भर के देशों में कोरोना वायरस से जो लोग पीड़ित हैं उनकी संख्या में इजाफा हो रहा है। केंद्र और राज्य सरकार भारत में लगातार इसके रोकथाम का प्रयास कर रही है लेकिन संख्या में बढ़ोतरी जारी है। ऐसी आपदा की स्थिति में लोगों से पैसा नहीं लिया जाना चाहिए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्राइवेट लैब को कोरोना से संबंधित जांच के लिए पैसे लेने की इजाजत नहीं होनी चाहिए। 

दिन में सुनवाई के बाद शाम को आया फैसला
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. रवींद्र भट्ट की बेंच ने सुझाव में कहा था कि सरकार ऐसा मैकेनिजम बनाए जिससे कि प्राइवेट लैब कोरोना टेस्ट के लिए मनमाना रकम न वसूले और सरकार को चाहिए कि वह प्राइवेट लैब द्वारा ली गई रकम वापस करे। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वह निर्देश लेकर आएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह इस मामले में आदेश पारित करेंगे और फिर देर शाम सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पारित कर कहा है कि कोरोना टेस्ट फ्री में होगा। 

जांच के लिए पैसे लिए जाएंगे तो लोग इससे बचेंगे: SC
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले में पिछली सुनवाई में जवाब दाखिल करने को कहा था। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अर्जी में कहा गया है कि देश भर में लॉकडाउन की स्थिति है ऐसे में लोगों के सामने पैसे की किल्लत है और ऐसे में कोरोनों की जांच के लिए ली जाने वाली रकम के कारण लोग टेस्ट कराने से बचेंगे और फिर इस कारण कोरोना वायरस की महामारी और ज्यादा बढ़ सकती है ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह कोरोना टेस्ट फ्री में कराए।

केंद्र को 2 हफ्ते में हलफनामा दायर करने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि देश भर में 118 लैब हैं और 15 हजार टेस्ट हो रहे हैं। अभी सरकार को नहीं पता कि कतने लैब की जरूरत और पड़ सकती है और लॉकडाउन की मियाद क्या होगी। तब सुप्रीम कोर्ट ने सुझाया कि ये तय होना चाहिए कि प्राइवेट लैब कोरोना टेस्ट के लिए अपनी मनमानी वाली रकम न वसूलें।

21 मार्च को केंद्र ने तय किए थे कोरोना टेस्ट के रेट
दरअसल केंद्र सरकार ने 21 मार्च को निजी प्रयोगशालाओं को प्रत्येक कोविड-19 जांच के लिए अधिकतम मूल्य 4,500 रुपये तक रखने की सिफारिश की थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से 21 मार्च की रात को इसका नोटिफिकेश जारी किया गया था। जारी गाइडलाइन के मुताबिक, कोरोना वायरस के संक्रमण की जांच के लिए अधिकतम 4,500 रुपये तक ही वसूले जा सकते थे। इसके तहत, किसी संदिग्ध मरीज की स्क्रीनिंग टेस्ट के लिए 1,500 रुपये से ज्यादा नहीं लिया जा सकता था। अगर स्क्रीनिंग टेस्ट में रिजल्ट पॉजिटिव आए और उसकी पुष्टि के लिए फिर से जांच करनी हो तो इसके लिए 3,000 हजार रुपये लिए जा सकते थे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया था कि दिशानिर्देश का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।