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विवादित नक्शे पर अब नेपाल को चीन की ही चाल से घेरेगा भारत!
June 1, 2020 • Rajkumar Gupta

नई दिल्ली
नेपाल सरकार ने देश के नए राजनीतिक नक्शे में भारत के तीन इलाकों लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को शामिल किया है। इससे संबंधित संविधान संशोधन विधेयक रविवार को नेपाली संसद में पेश किया गया। भारत ने नेपाल के इस कदम पर सख्त नाराजगी जताई है। नेपाल को कड़ा संदेश देने के लिए भारत अब इस मुद्दे पर नेपाल को चीन की ही चाल से घेरना चाहता है।
भारत का मानना है कि नेपाल इस बात को नजरअंदाज कर रहा है कि भारत और चीन के बीच हुए समझौतों के मुताबिक लिपुलेख 1991 से बाद से ही दोनों देशों के बीच सीमा पर कारोबार का पॉइंट रहा है। नेपाल लिपुलेख पर अपना दावा कर रहा है।

संसद से मुहर लगने की उम्मीद
दोनों देशों के बीच रिश्तों को पटरी पर लाने के लिए तेजी से राजनयिक प्रयास जारी है लेकिन इस विधेयक को नेपाली संसद की मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद है। नेपाल के प्रमुख विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने ही सबसे पहले लिपुलेख को भारत के नए नक्शे में शामिल किए जाने का विरोध किया था। इसके बाद सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने भारत विरोधी राष्ट्रवाद को हवा देने के लिए इस पर सख्त रवैया अपनाया।

नेपाल पर नजर रखने वालों का कहना है कि प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली की सरकार के इस कदम से दोनों देशों के लोगों के संबधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस पूरे मामले में चीन की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है।

भारत-चीन समझौतों की अनदेखी
हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स को सूत्रों ने बताया कि भारत नेपाल के समक्ष यह बात रखेगा कि नक्शे में बदलाव के उसके फैसले में भारत और चीन के बीच हुए कुछ समझौतों को नजरअंदाज किया गया है। हैरानी की बात है कि नेपाल नें 1990 के दशक से इन समझौतों पर कभी आपत्ति नहीं जताई है।

दिसंबर 1991 में चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री ली पेंग की भारत यात्रा में दोनों देशों ने सीमा पर व्यापार बहाल करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें आपसी सहमति से लिपुलेख को बॉर्डर ट्रेडिंग पॉइंट बनाया गया था। इससे अगले साल यानी जुलाई 1992 में भारत और चीन ने सीमा पर कारोबार के लिए प्रोटोकॉल फॉर एंट्री एंड एक्जिट प्रोसीजर पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें भी लिपुलेख को आपसी सहमति से बॉर्डर ट्रेडिंग पॉइंट बनाया गया था।

बॉर्डर ट्रेडिंग पॉइंट है लिपुलेख
11 अप्रैल, 2005 में चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर आपसी विश्वास बढ़ाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके आर्टिकल 5 में कहा गया कि दोनों देश बॉर्डर मीटिंग पॉइंट्स के मैकेनिज्म को बढ़ाने के ईस्टर्न सेक्टर में किबिथू-दमाई और मिडल सेक्टर में लिपुलेख पास/कियांग ला को इसमें शामिल करने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हैं।

भारत को शनिवार को उस समय झटका लगा जब नेपाली कांग्रेस ने यू-टर्न लेते हुए संसद में संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन करने का फैसला किया। इस विधेयक को पिछले बुधवार को संसद में पेश किया जाना था लेकिन नेपाली कांग्रेस ने कहा कि इस मुद्दे पर वह पार्टी के भीतर चर्चा करना चाहती है। इसके बाद इस विधेयक को कार्यसूची से हटा दिया गया था।